डेटा लीक की आशंका के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सख्त, एप्पल सप्लाई चेन में सुरक्षा व्यवस्था को किया मजबूत
- Shiv Kumar
- 27 Jun, 2026
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में कथित डेटा लीक का गंभीर मामला सामने आने के बाद कंपनी ने अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डार्क वेब पर लाखों फाइल्स अपलोड होने की आशंका जताई गई है, जिसके बाद कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को जांच में शामिल किया है। साथ ही इस पूरे मामले की जानकारी सरकार और प्रमुख ग्राहकों को भी दे दी गई है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और कंपनी ने अपने सिस्टम की सुरक्षा को प्राथमिकता पर रखा है।
डार्क वेब पर लाखों फाइल्स का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ल्ड लीक्स नाम के एक रैनसमवेयर ग्रुप ने डार्क वेब पर करीब दो लाख से अधिक फाइल्स अपलोड करने का दावा किया है। इनमें कई बड़ी कंपनियों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज होने की बात कही जा रही है, जिसमें एप्पल और टेस्ला से जुड़े कथित डिजाइन और इंजीनियरिंग डेटा का भी उल्लेख है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने केवल एक साइबर सुरक्षा घटना की जानकारी मिलने की बात स्वीकार की है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि इसका उत्पादन या दैनिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ा है।
सुरक्षा कड़ी, एक्सेस सीमित किया गया
घटना के बाद कंपनी ने अपने सभी कार्यालयों और उत्पादन इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया है। संवेदनशील सिस्टम्स तक रिमोट एक्सेस को सीमित किया गया है और केवल चुनिंदा कर्मचारियों को ही अनुमति दी गई है। इसके साथ ही खरीद और आपूर्ति से जुड़े सिस्टम की भी सुरक्षा जांच तेज कर दी गई है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। कंपनी का फोकस फिलहाल डेटा सुरक्षा को मजबूत करने पर है।
एप्पल की भूमिका और भारत में असर
इस पूरे मामले में एप्पल की सिक्योरिटी टीम भी जांच और सुरक्षा सुधार में सहयोग कर रही है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एप्पल की भारत में सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में इस तरह की साइबर घटना को केवल कंपनी स्तर की समस्या नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में आईफोन उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में डेटा सुरक्षा और भी अहम हो जाती है, जिससे वैश्विक टेक इकोसिस्टम पर भी असर पड़ सकता है।
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