Meta की नई AI तकनीक से बदलेगा भविष्य, बिना चिप के सिर्फ सोचने से ही टाइप होगा मैसेज, जानिए न्यूरालिंक से कैसे है अलग

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मेटा ने ब्रेन2क्वर्टी v2 एआई सिस्टम पेश किया है, जो बिना सर्जरी दिमाग के सिग्नल पढ़कर उन्हें टेक्स्ट में बदल सकता है। यह तकनीक लकवा, ब्रेन इंजरी और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए भविष्य में संवाद का नया माध्यम बन सकती है।

मेटा ने अपने डिजिटल ब्रेन प्रोजेक्ट के तहत ब्रेन2क्वर्टी v2 नाम का एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम पेश किया है, जो भविष्य में इंसानों के संवाद करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। यह तकनीक दिमाग की न्यूरल गतिविधियों को पढ़कर उन्हें सीधे लिखित टेक्स्ट में बदलने में सक्षम है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी तरह की सर्जरी या दिमाग में चिप लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह तकनीक खास तौर पर उन लोगों के लिए विकसित की गई है, जो लकवा, ब्रेन इंजरी या अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के कारण बोलने या अपनी बात व्यक्त करने में असमर्थ हैं। आने वाले समय में ऐसे लोग केवल सोचकर ही अपनी बात लिख सकेंगे।


हेलमेट से रिकॉर्ड होगी दिमाग की गतिविधि

ब्रेन2क्वर्टी v2 पूरी तरह नॉन-इनवेसिव तकनीक पर आधारित है। इसमें मैग्नेटोएन्सेफैलोग्राफी (MEG) तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो दिमाग से निकलने वाले बेहद सूक्ष्म मैग्नेटिक सिग्नल्स को रिकॉर्ड करती है। इसके लिए उपयोगकर्ता को केवल एक विशेष हेलमेट पहनना होता है, जो लगातार ब्रेन एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता रहता है। इसके बाद एआई मॉडल इन सिग्नल्स का विश्लेषण कर उन्हें सीधे टेक्स्ट में बदल देता है। कंपनी के अनुसार नया मॉडल एंड-टू-एंड डीप लर्निंग तकनीक पर काम करता है, जिससे यह रॉ ब्रेन सिग्नल्स से भी भाषा को समझने और डिकोड करने में सक्षम है। इससे संवाद करने में असमर्थ लोगों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं।



न्यूरालिंक से अलग है तकनीक

मेटा के शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक ने औसतन 61 प्रतिशत वर्ड एक्यूरेसी हासिल की, जबकि सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी का दावा है कि बड़े भाषा मॉडल की मदद से सिस्टम संदर्भ और व्याकरण को समझकर कई गलतियों को स्वतः सुधार भी सकता है। यह तकनीक एलन मस्क की न्यूरालिंक से अलग है, क्योंकि इसमें दिमाग के भीतर चिप लगाने की आवश्यकता नहीं होती। केवल एमईजी आधारित हेलमेट पहनकर ब्रेन सिग्नल रिकॉर्ड किए जाते हैं। मेटा के अलावा अन्य टेक कंपनियां भी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य और संचार के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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