तमिलनाडु के मिड-डे मील में चिकन बिरयानी? एक प्रस्ताव ने छेड़ दी देशभर में बहस
तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के तहत हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी परोसने के प्रस्ताव ने सियासी और सामाजिक बहस छेड़ दी है।
- Babli Ansari
- 30 Jul, 2026
चेन्नई। तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में चलने वाली मिड-डे मील (दोपहर भोजन) योजना एक नए प्रस्ताव को लेकर चर्चा में है। स्कूल शिक्षा विभाग के सामने कुछ शिक्षक संगठनों ने सुझाव रखा है कि छात्रों को सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी परोसी जाए, ताकि भोजन अधिक पौष्टिक और आकर्षक बन सके। इस प्रस्ताव के सामने आते ही पूरे राज्य में ही नहीं, बल्कि देशभर में इस पर बहस शुरू हो गई है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और मामला विचाराधीन है।
सिर्फ भोजन नहीं, पोषण का मुद्दा
शिक्षक संगठनों का कहना है कि कई छात्र स्कूल के मिड-डे मील पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में भोजन में प्रोटीन और पोषण बढ़ाने के लिए चिकन बिरयानी जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है। समर्थकों का तर्क है कि इससे बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ सकती है और उन्हें बेहतर पोषण भी मिलेगा। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से चल रहे भोजन की गुणवत्ता सुधारने पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।
राजनीतिक बहस भी हुई तेज
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे बच्चों के पोषण से जोड़कर सकारात्मक पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि सरकार को पहले मौजूदा मिड-डे मील व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए। फिलहाल स्कूल शिक्षा मंत्री ने इतना ही कहा है कि शिक्षक संगठनों की मांग सरकार के विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा। अभी तक चिकन बिरयानी को मेन्यू में शामिल करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
अभी नहीं हुआ अंतिम फैसला
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है, कोई लागू योजना नहीं। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो पोषण, बजट और आपूर्ति व्यवस्था जैसे सभी पहलुओं पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसलिए फिलहाल छात्रों के मिड-डे मील में चिकन बिरयानी शामिल किए जाने की खबर पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।
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