अम्बुज होटल रियल स्टेट कंपनी के खिलाफ वेंडर्स ने खोला मोर्चा, माल ख़रीदने के बाद नहीं दिया पैसा, करोड़ों रुपए बकाया

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पिछले एक साल से 30 से अधिक वेंडर्स का नहीं दिया गया लगभग 8 करोड़ रुपए

Noida: आईआरसीटीसी के रजिस्टर वेंडर अंबुज होटल एंड रियल एस्टेट के खिलाफ उनके को-वेंडर्स ने मोर्चा खोल दिया है। नोएडा मीडिया क्लब में वेंडर्स ने की प्रेस कॉन्फ़्रेंस गंभीर आरोप लगाए हैं। वेंडर्स ने बकाया भुगतान न करने और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पिछले एक साल से 30 से अधिक वेंडर्स का लगभग 8 करोड़ रुपए नहीं देने का आरोप लगाया है। वहीं, कंपनी ने आरोपों को निराधार बताया है।  

सामान सप्लाई के 8 करोड़ रुपये बाकी
मीडिया से बातचीत करते हुए वेंडर्स ने कहा कि यह एक अत्यंत गंभीर एवं जनहित से जुड़ा मामला है। सीधे तौर पर भारतीय रेलवे कैटरिंग सिस्टम, एमएसएमई क्षेत्र, हजारों लघु व्यापारियों की आजीविका से जुड़ा मामला है। अंबुज होटल एंड रियल एस्टेट आईआरसीटीसी के अधिकृत केटरिंग सेवा प्रदाता है। वर्तमान में पूरे भारत में 60 से अधिक मेल, एक्सप्रेस एवं वंदे भारत ट्रेनों में खाद्य सेवा का संचालन करती है। लेकिन कंपनी बीते 6-8 महीनों से सैकड़ों सप्लायरों, वेंडरों का भुगतान रोक कर बैठी है। बकाया राशि लगभग 7-8 करोड़ रुपये गई है।  कंपनी की निदेशक सौमया सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए वेंडर्स ने कहा कि अपने आईपीएस पति की धमकी  देती है। वेंडर्स की मांग केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव से पूरे मामले का संज्ञान लेने का आरोप लगाया है।

पैसे मांगने पर मारपीट और धमकाया जाता
वेंडर्स सुशील तोमर ने कहा कि अंबुज होटल के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय में भुगतान की मांग को लेकर जाते हैं तो बाउंसरों के माध्यम से डराया-धमकाया जाता है। कई वेंडरों से मारपीट भी की जा चुकी है। इस कंपनी को जीएसटी इनवॉइस के साथ सामान सप्लाई किया है। एमएसएमई नियमों के अंतर्गत सभी सबूत हम लोगों के पास हैं। इसके बावजूद न भुगतान हो रहा है, न कोई सुनवाई हो रही है। वेंडरों ने आईआरसीटीसी से कंपनी का टेंडर निरस्त करने, वेंडरों का बकाया भुगतान के लिए दिशा निर्देश जारी करने, उच्च स्तरीय जांच कराने, वेंडर प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क लागू करने की मांग की।

कंपनी ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, अंबुज होटल एंड रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से कहा गया है कि एमएसएमई वेंडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले विक्रेताओं के आरोप निराधार हैं। आरोप न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का जान-बूझकर किया गया प्रयास है। आरोप लगाने वाले सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर करेगी।

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