अब ‘तीर’ और ‘बाज’ के वार से बच नहीं पाएंगे दुश्मन, UP ट्रेड शो में मॉडल पेश
प्रदर्शन और क्षमता की पहली प्रयोगात्मक जांच की जाएगी।
- Shiv Kumar
- 27 Sep, 2025
Greater Noida: इंडिया एक्सपो मार्ट सेंटर में गुरुवार से शुरू हुए यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहले ही दिन देशी सैन्य तकनीक की मौजूदगी ने खास ध्यान खींचा। आयोजन में लखनऊ की एक कंपनी ने अपने पायलट-रहित लड़ाकू विमान का मॉडल प्रदर्शित किया, जिसे कंपनी ने ‘‘तीर’’ नाम दिया है। साथ ही कंपनी ने अपने एक अन्य मॉडल ‘बाज’ का भी जिक्र किया। प्रदर्शनी में रखे गए इन प्लेटफॉर्म्स की आधुनिक स्वचालित नेविगेशन और निशानेबाज़ी क्षमताओं पर जोर दिया गया।
500 किलोमीटर की दूरी तय करने की क्षमता
कंपनी का दावा है कि ‘तीर’ पूरी तरह कंप्यूटर नियंत्रित प्रणाली पर काम करेगा और इसमें पायलट की आवश्यकता नहीं होगी। प्रदर्शित विवरण के अनुसार यह पेट्रोल इंजन से संचालित होगा और एक बार में करीब 500 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। कंपनी ने बताया कि तीर का तकनीकी ट्रायल 15 अक्तूबर को आईआईटी कानपुर में आयोजित किया जाएगा, जहां इसके प्रदर्शन और क्षमता की पहली प्रयोगात्मक जाँच की जाएगी।
100 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम
कंपनी प्रतिनिधियों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग किए गए कुछ विमान महंगे थे, इसलिए उन्होंने सस्ता और घरेलू समाधान विकसित करने का लक्ष्य रखा। उन्होंने दावा किया कि ‘तीर’ का निर्माण मात्र लगभग दो करोड़ रुपये की लागत में संभव है। यह प्लेटफॉर्म करीब 100 किलो तक वजन का पेलोड, जिसमें विस्फोटक सामग्रियां भी शामिल हो सकती हैं ले जाने में सक्षम है। इसे निर्दिष्ट लक्ष्यों तक पहुँचाने के लिए स्वचालित निर्देशानुक्रमों पर चलाया जा सकेगा।
प्रदर्शनी में मौजूद कंपनी ने यह भी कहा कि उनके द्वारा विकसित किए गए कई ड्रोन पहले ही कुछ सुरक्षा संस्थानों द्वारा उपयोग में लाये जा रहे हैं। लेकिन लड़ाकू विमान उनके लिए नया और बड़ा कदम है, जिसे वे आगे सैन्य प्रयोगों के लिए सशस्त्र बलों को देने की योजना बना रहे हैं। प्रतिनिधियों ने यह भी जिक्र किया कि वास्तविक तैनाती या सैन्य मंजूरी के लिए कठोर परीक्षण, मानकीकरण और आधिकारिक अनुमोदन आवश्यक होंगे।
रक्षा विशेषज्ञ और आयोजित प्रतिनिधि इस तरह के दावों को सावधानी के साथ देख रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शित मॉडल और कंपनी के बयान प्रारम्भिक जानकारी के रूप में महत्वपूर्ण हैं, पर वास्तविक क्षमता, विश्वसनीयता और अनुपालन तभी स्थापित होगा जब स्वतंत्र पायलट परीक्षण और रक्षा मंत्रालय/सैन्य निकायों की औपचारिक जाँच पूरी हो।
ट्रेड शो में ‘तीर’ और ‘बाज’ जैसे घरेलू प्लेटफॉर्म्स की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि निजी क्षेत्र और स्टार्टअप रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में सक्रिय हो रहे हैं और सस्ती स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर काम कर रहे हैं। आयोजन में आए विशेषज्ञ और आगंतुक अब कंपनी द्वारा घोषित 15 अक्तूबर के ट्रायल के नतीजों और भविष्य में आने वाली आधिकारिक रिपोर्टों पर नज़र बनाए हुए हैं।
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