यूपी रेरा का फर्जी आदेश बनवाकर बैंक से ऋण मांगने वाला बिल्डर पकड़ा गया, जानिए कौन है?

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एएसजीआई प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड पर बीटा-दो कोतवाली में धोखाधड़ी का केस दर्ज

Greater Noida: यूपी रेरा (उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण) का फर्जी आदेश तैयार कर बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने के आरोप में गाजियाबाद की बिल्डर कंपनी एएसजीआई प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। यह केस ग्रेटर नोएडा स्थित यूपी रेरा कार्यालय के अवर अभियंता रमेश कुमार पांडेय की तहरीर पर बीटा-दो कोतवाली में दर्ज हुआ है।

समय विस्तार का फर्जी आदेश बनाया
गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा में स्थित सुशांत एक्वापोलिस प्रोजेक्ट में एएसजीआई प्रॉपर्टीज का एप्पल टावर नाम से प्रोजेक्ट है। इसमें एस-2ए और एस-2बी नाम के दो टावरों में 170 से अधिक फ्लैट्स बनाए जाने हैं. प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हुआ और यूपी रेरा में इसका पंजीकरण भी समाप्त हो गया। बिल्डर ने समय विस्तार के लिए आवेदन किया था, लेकिन रेरा ने विस्तार देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि इसके बावजूद बिल्डर ने यूपी रेरा के नाम से एक फर्जी आदेश तैयार कराया, जिसमें प्रोजेक्ट को समय विस्तार दिखाया गया। इस कथित आदेश को दिखाकर बिल्डर विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने की कोशिश कर रहा था। इसकी जानकारी एएसजी एप्पल बायर्स एसोसिएशन ने 4 अगस्त को यूपी रेरा को लिखे पत्र में दी। शिकायत मिलने के बाद रेरा ने जांच की तो पता चला कि कोई भी समय विस्तार आदेश जारी ही नहीं हुआ था।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा, पुलिस जांच में जुटी
रेरा की जांच में पाया गया कि बिल्डर के आवेदन पर 24 फरवरी 2025 को परामर्श एवं मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक हुई थी, लेकिन उस बैठक में प्रोजेक्ट को समय विस्तार देने संबंधी कोई निर्देश नहीं दिए गए थे। साथ ही, 3 मार्च 2025 की तारीख का भी कोई आदेश जारी नहीं हुआ था। बावजूद इसके बिल्डर उसी तारीख के कथित आदेश के आधार पर ऋण मांग रहा था। बीटा-दो कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि एएसजीआई प्रॉपर्टीज के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि फर्जी आदेश तैयार कराने में और कौन-कौन शामिल थे।

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