पहले रेप का दर्ज कराया केस, फिर बयान से मुकरी महिला, 9 साल बाद निर्दोष व्यक्ति को मिला न्याय
महिला पर झूठी गवाही देने का केस दर्ज करने का आदेश
- Shiv Kumar
- 13 Oct, 2025
Noida एडिशनल सेशंस और फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने वर्ष 2020 में दर्ज दुष्कर्म के एक झूठे मामले में आरोपी को आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने साथ ही शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 344 के तहत झूठी गवाही देने का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
महिला ने लगाया था अपहरण और दुष्कर्म का आरोप
जुलाई 2020 में शिकायतकर्ता महिला ने एक व्यक्ति सुभाष, उसके भाई राजेंद्र और बहन उधा देवी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। उसने कहा था कि तीनों ने उसका अपहरण कर बंदूक की नोक पर सुभाष से जबरन शादी कराई और सुभाष ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जांच के दौरान रबूपुरा थाना पुलिस को राजेंद्र और उधा देवी की संलिप्तता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने केवल सुभाष के खिलाफ धारा 376 और 506 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। सुभाष को 4 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था और अदालत ने 27 मई 2022 को मामले का संज्ञान लिया।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट में महिला ने पलटे अपने बयान
फास्ट-ट्रैक कोर्ट में बयान दर्ज कराते समय महिला ने एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों से मुकर गई। उसने बताया कि उसका पति उसे प्रताड़ित करता था, जिसके कारण वह अपने बच्चों को लेकर सुभाष के पास स्वेच्छा से चली गई थी। महिला ने कहा, “जब मैं वापस लौटी तो मेरे पति ने एक शिकायत लिखी और उस पर मेरा अंगूठा लगवाकर पुलिस को दे दी, ताकि सुभाष के खिलाफ झूठा मामला बनाया जा सके। पति और पुलिस के दबाव में झूठा बयान दिया था और राजेंद्र या उधा देवी से कभी मुलाकात नहीं की थी।
कोर्ट ने 164 के बयान को ठोस साक्ष्य मानने से किया इनकार
प्रॉसिक्यूशन की ओर से शिकायतकर्ता द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए धारा 164 के बयान को आधार बनाने की कोशिश की गई, लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले दिल्ली स्टेट बनाम श्री राम लोहिया (AIR 1950) का हवाला देते हुए कहा कि धारा 164 के तहत दर्ज बयान को पुष्ट साक्ष्य नहीं माना जा सकता। ऐसे बयान का उपयोग केवल विरोधाभास या खंडन के लिए किया जा सकता है, न कि मुख्य साक्ष्य के रूप में। सभी तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के आरोप असत्य और आधारहीन थे। परिणामस्वरूप आरोपी सुभाष को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया और शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ झूठी गवाही देने के लिए कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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