30 साल की वफादारी, मालिक के लिए समर्पित किया पूरा जीवन, बेटे की शादी में नहीं बुलाया तो बुजुर्ग पहुंचा थाने
- Shiv Kumar
- 11 Jan, 2026
यूपी के ग्रेटर नोएडा स्थित दनकौर थाने में शुक्रवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पुलिसकर्मियों के साथ-साथ वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। यह मामला न तो किसी अपराध से जुड़ा था और न ही किसी कानूनी विवाद से, बल्कि एक बुजुर्ग व्यक्ति की भावनात्मक पीड़ा और आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ था। शिकायत लेकर थाने पहुंचे बुजुर्ग की बात सुनकर पुलिस ने न सिर्फ धैर्यपूर्वक पूरा घटनाक्रम सुना, बल्कि उन्हें समझाने की कोशिश भी की। हालांकि मामला कानूनी दायरे में न आने के कारण पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकी।
30 साल की मेहनत, भरोसा और अपनापन
करीब 60 वर्षीय आस मोहम्मद दनकौर कस्बे के शोक बाजार इलाके में स्थित एक बर्तन की थोक दुकान पर पिछले लगभग 30 वर्षों से काम कर रहे हैं। बुजुर्ग का कहना है कि उन्होंने अपनी जवानी से लेकर बुढ़ापे तक दुकान और मालिक के कारोबार को खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सुबह दुकान खोलने से लेकर रात में ताला लगाने तक, उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम किया। इस लंबे समय में उनका रिश्ता सिर्फ एक कर्मचारी और मालिक का नहीं रहा, बल्कि परिवार जैसा बन गया था। आस मोहम्मद का कहना है कि उन्होंने मालिक के घर के सुख-दुख में हमेशा साथ दिया और खुद को परिवार का हिस्सा समझा। इसी भरोसे और अपनापन के कारण उन्हें उम्मीद थी कि परिवार के खास मौकों में उन्हें जरूर याद किया जाएगा। लेकिन हाल ही में जब मालिक के बेटे की शादी हुई और उन्हें न तो सगाई में बुलाया गया और न ही शादी में, तो यह बात उनके लिए गहरा झटका साबित हुई।
शादी में नहीं बुलाए जाने से टूटा मन
बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि जब उन्हें बाद में शादी हो जाने की जानकारी मिली, तो उन्हें बेहद अपमान और दुख महसूस हुआ। उनका कहना था कि 30 साल की मेहनत और वफादारी के बाद इस तरह नजरअंदाज किया जाना उन्हें अंदर तक तोड़ गया। इसी मानसिक पीड़ा के चलते वह न्याय की उम्मीद लेकर दनकौर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराने की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनी और समझाया कि किसी शादी में न बुलाना कानूनन अपराध नहीं है, इसलिए इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। पुलिस ने बुजुर्ग की भावनाओं को जायज बताते हुए उन्हें आपसी बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की सलाह दी। बुजुर्ग की बेबसी देखकर थाने में मौजूद पुलिसकर्मी भी भावुक नजर आए।
कानून से बाहर, भावनाओं से जुड़ा मामला
फिलहाल इस मामले में दूसरे पक्ष यानी दुकान मालिक की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि 30 साल पुराने कर्मचारी को बेटे की शादी में नहीं बुलाया गया। यह मामला कानून से ज्यादा इंसानी रिश्तों और भावनाओं पर सोचने को मजबूर करता है।
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