नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी पर योगी सरकार का एक्शन, वेटिंग में डाला, जानें क्या है मामला
- Shiv Kumar
- 13 Jan, 2026
नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी ) से जुड़े कैलेंडर विवाद में शासन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक और नोएडा प्राधिकरण में ओएसडी रहे आईएएस अधिकारी महेंद्र प्रसाद को शासन से अटैच कर दिया गया है। साथ ही उन्हें प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है। यह कार्रवाई एनएमआरसी के वर्ष 2026 के कैलेंडर में अधिकारियों की तस्वीरें छपने और उसके वायरल होने के बाद की गई है। मामले ने तूल पकड़ने के बाद पहले एनएमआरसी स्तर पर और अब शासन स्तर पर कार्रवाई हुई है।
कैलेंडर में फोटो छपने से शुरू हुआ पूरा विवाद
पूरा विवाद एनएमआरसी के 2026 के आधिकारिक कैलेंडर को लेकर सामने आया। इस कैलेंडर के अलग-अलग महीनों के पन्नों पर वरिष्ठ अधिकारियों की तस्वीरें प्रकाशित की गई थीं। जुलाई महीने के पेज पर तत्कालीन कार्यकारी निदेशक और ओएसडी महेंद्र प्रसाद की दो तस्वीरें छपी थीं। इन तस्वीरों में वह एक स्थान पर चलते हुए और एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नजर आ रहे थे। महेंद्र प्रसाद 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उनका जन्मदिन 5 जुलाई को पड़ता है। जैसे ही कैलेंडर सामने आया और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, इसे लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगा कि सरकारी संस्था के कैलेंडर में व्यक्तिगत प्रचार की झलक दिखाई दे रही है, जो सेवा नियमों के खिलाफ मानी जा रही है।
एनएमआरसी स्तर पर पहले हुई कार्रवाई
फोटो वायरल होने के तुरंत बाद एनएमआरसी के प्रबंध निदेशक और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने कड़ा रुख अपनाया। महेंद्र प्रसाद को कार्यकारी निदेशक के पद से हटा दिया गया। उनकी जगह यह जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश को सौंपी गई थी। लोकेश एम स्वयं 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उनका जन्मदिन 3 अप्रैल को पड़ता है। एनएमआरसी कैलेंडर के अप्रैल महीने के पेज पर उनकी भी दो तस्वीरें प्रकाशित की गई थीं। एक तस्वीर में वह सितार बजाते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी में वह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे हैं। हालांकि इस मामले में सबसे ज्यादा विवाद जुलाई महीने के पन्नों को लेकर सामने आया, जिसके बाद महेंद्र प्रसाद पर कार्रवाई केंद्रित रही।
शासन ने लिया सख्त संज्ञान, प्रतीक्षा सूची में डाले गए
मंगलवार को शासन ने अपने स्तर पर इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए महेंद्र प्रसाद को नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी पद से भी हटा दिया। इसके साथ ही उन्हें प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम यह संदेश देने के लिए उठाया गया है कि सरकारी संस्थानों और पदों का उपयोग किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत प्रचार के लिए स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल महेंद्र प्रसाद प्रतीक्षा सूची में हैं और आगे उनके दायित्व को लेकर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। यह मामला नौकरशाही में अनुशासन और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर एक अहम उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
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