नोएडा में स्टॉल्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स नीति के तहत बिल्डरों को बड़ी राहत, अभी भी जमा कर सकते हैं बकाया 25 फीसदी मेंडेटरी फीस, आया नया फैसला
- Shiv Kumar
- 14 Jan, 2026
घर खरीदारों को राहत देने और वर्षों से अटकी आवासीय परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की स्टॉल्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स नीति के तहत अब उन बिल्डरों को भी नीति का लाभ मिलता रहेगा, जिन्होंने तय समयसीमा में पुनर्गणना की गई बकाया राशि का अनिवार्य 25 प्रतिशत हिस्सा जमा नहीं किया था। यह निर्णय 3 जनवरी को हुई नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में लिया गया, जिसे हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।
बोर्ड बैठक में पलटा गया पुराना फैसला
नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में 21 दिसंबर 2023 को राज्य सरकार द्वारा जारी उस आदेश को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई, जिसे पहले ही कैबिनेट की स्वीकृति मिल चुकी थी। इसके साथ ही बोर्ड ने अपने उस पुराने प्रस्ताव को भी पलट दिया, जिसमें शर्तों का पालन न करने वाले बिल्डरों से नीति के सभी लाभ वापस लेने की सिफारिश की गई थी। बोर्ड का मानना है कि सख्त निर्णयों से परियोजनाएं और अधिक फंस सकती हैं, जिसका सीधा नुकसान घर खरीदारों को उठाना पड़ता। इसलिए अब नीति के तहत मामलों की समीक्षा व्यक्तिगत रूप से करने का निर्णय लिया गया है, न कि सामूहिक रूप से सभी पर एक ही कार्रवाई की जाए।
57 परियोजनाएं नीति के दायरे में, 872 करोड़ जमा
अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के तहत कुल 57 अटकी हुई परियोजनाओं को इस नीति के दायरे में लाया गया था। इनमें से 31 दिसंबर 2025 तक 36 परियोजनाओं के डेवलपर्स ने नीति का लाभ लिया, जो कुल का लगभग 60 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, चार ऐसी परियोजनाएं हैं जिनमें डेवलपर्स ने सहमति देने के बावजूद कोई भुगतान नहीं किया। वहीं 11 डेवलपर्स ऐसे हैं जिन्होंने 25 प्रतिशत राशि के मुकाबले आंशिक भुगतान किया है। इन सभी परियोजनाओं से अब तक कुल 872.12 करोड़ रुपये की धनराशि नोएडा प्राधिकरण के पास जमा कराई जा चुकी है। इस भुगतान के आधार पर 6,855 फ्लैट खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री संभव हुई है। इनमें से 4,134 फ्लैटों की रजिस्ट्री पहले ही पूरी की जा चुकी है। बोर्ड ने शेष योग्य मामलों में भी जल्द रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए हैं।
बकाया चुकाने वालों को मिलेगा एक और मौका
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने बोर्ड को बताया कि स्टॉल्ड रियल एस्टेट नीति राज्य सरकार की पहल है और इसे पूरी तरह वापस लेना उचित नहीं होगा। जो बिल्डर बकाया राशि चुकाने की मंशा रखते हैं, उन्हें अवसर मिलना चाहिए। बोर्ड ने इस पर सहमति जताई और तय किया कि डिफॉल्टर बिल्डरों के मामलों को केस-टू-केस आधार पर परखा जाएगा। बोर्ड को यह भी बताया गया कि नीति लागू होने के समय 57 परियोजनाओं में कुल 21,034 फ्लैटों की रजिस्ट्री लंबित थी। अब भुगतान की प्रगति के साथ धीरे-धीरे इन फ्लैटों के पंजीकरण का रास्ता साफ हो रहा है। इस फैसले से लंबे समय से इंतजार कर रहे हजारों घर खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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