तीन महीने में फट गया ब्रांडेड जूता, वारंटी के बाद भी कंपनी ने रिपेयर करने से किया मना, अब कंज्यूमर कोर्ट का फैसला जान आप कहेंगे- बढ़िया!
- Shiv Kumar
- 15 Jan, 2026
ग्रेटर नोएडा में जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता हित में एक अहम और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने रेड चीफ ब्रांड के जूते की कीमत छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 30 दिन के भीतर लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक रूप से उपभोक्ता को परेशान करने के लिए 500 रुपये और कोर्ट में खर्ड के रूप में भी 500 रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला जिला उपभोक्ता आयोग, गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा की पीठ ने सुनाया हैं। आयोग ने अपने आदेश में साफ कहा कि कंपनी की ओर से सर्विस में साफ लापरवाही सामने आई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
बिसरख कोतवाली में तैनात धीरेंद्र कुमार ने 10 मार्च 2024 को रेड चीफ ब्रांड का जूता ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड से 3,143 रुपये में खरीदा था। कंपनी की ओर से जूते पर एक साल की वारंटी दी गई थी, लेकिन महज तीन महीने के भीतर ही जूता फट गया। उपभोक्ता द्वारा शिकायत करने पर कंपनी ने जूता ठीक करने से इनकार कर दिया और जांच के नाम पर जूता अपने पास रख लिया। हैरानी की बात यह रही कि न तो जूता वापस किया गया और न ही खरीदी गई राशि लौटाई गई। लंबे समय तक इंतजार और बार-बार संपर्क के बावजूद कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी।
दूसरी बार भी मिला खराब जूता
मजबूरी में धीरेंद्र कुमार ने 11 अगस्त 2024 को उसी कंपनी से दोबारा रेड चीफ ब्रांड का जूता 3,143 रुपये में खरीदा। हालांकि इस बार भी अनुभव निराशाजनक रहा। उपयोग के कुछ समय बाद ही जूते का निचला हिस्सा ऊपरी हिस्से से अलग होने लगा। इस खामी की शिकायत कंपनी से की गई, लेकिन इस बार भी न तो जूता बदला गया और न ही धनराशि वापस की गई। लगातार दो बार खराब उत्पाद मिलने और शिकायतों के बावजूद समाधान न होने से उपभोक्ता का भरोसा पूरी तरह टूट गया।
आयोग ने दिया एकतरफा फैसला
दो बार खराब जूते मिलने और कंपनी की अनदेखी से परेशान होकर पीड़ित ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई भी जवाब या पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके चलते आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यह स्पष्ट रूप से उपभोक्ता सेवा में कमी का मामला है और उपभोक्ता को नियमानुसार मुआवजा दिया जाना आवश्यक है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
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