निक्की हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों के खिलाफ कोर्ट सख्त, किसी को राहत नहीं, जान लें ताजा अपडेट
- Shiv Kumar
- 15 Jan, 2026
ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में हुए बहुचर्चित निक्की हत्याकांड में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी सास दया की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सत्र न्यायालय में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को रिहा करने से साफ इनकार कर दिया। यह मामला 21 अगस्त 2025 का है, जब विवाहित महिला निक्की भाटी को जलाकर हत्या किए जाने का आरोप सामने आया था। घटना के बाद कासना कोतवाली पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मृतका के पति विपिन भाटी, सास दया, जेठ रोहित भाटी और ससुर सत्यवीर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर सभी को गिरफ्तार किया था। फिलहाल जेठ रोहित को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि अन्य आरोपी अब भी जेल में बंद हैं।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद आई जमानत याचिका
पुलिस इस सनसनीखेज मामले में पहले ही अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपी पक्ष की ओर से सास दया की जमानत के लिए सत्र न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया था। बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें निक्की भाटी पक्ष की ओर से वकील उधम सिंह तोंगड़ और संतोष बंसल ने अदालत के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने दलील दी कि मामला बेहद गंभीर है और आरोपी को जमानत मिलने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए जमानत याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक गंभीर अपराध का मामला है, ऐसे में आरोपी को रिहा करना उचित नहीं होगा।
500 पन्नों से ज्यादा की चार्जशीट, साजिश का आरोप
ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में हुई इस घटना को लेकर कासना कोतवाली पुलिस ने अदालत में 500 पन्नों से अधिक की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में निक्की के पति विपिन भाटी, जेठ रोहित भाटी, सास दया और ससुर सत्यवीर को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, चारों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया। जांच में सामने आया कि आरोपी निक्की और उसकी बहन के इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाने से नाराज थे। परिवार के विरोध के बावजूद जब निक्की वीडियो बनाना बंद नहीं हुई, तो ससुराल पक्ष के लोगों ने उसके साथ मारपीट की और उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। इन्हीं तथ्यों को आधार बनाते हुए अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
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