नोएडा में संपत्ति रजिस्ट्री फीस ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य, 20 हजार से अधिक शुल्क पर लागू नई व्यवस्था

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नोएडा में संपत्ति रजिस्ट्री के दौरान 20 हजार से अधिक पंजीकरण शुल्क का ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य कर दिया गया है। नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और नकद लेन-देन पर रोक लगेगी।

गौतमबुद्ध नगर जिले में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से पंजीकरण शुल्क को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान पंजीकरण शुल्क 20 हजार रुपये से अधिक होता है, तो उसका भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना अनिवार्य होगा। यह नई व्यवस्था बीते दो दिनों से प्रभावी है। प्रशासन का कहना है कि इस कदम से न केवल नकद लेन-देन पर रोक लगेगी, बल्कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले इसे चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया था, जिसके सफल परिणाम सामने आने के बाद अब इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया गया है। गौतमबुद्ध नगर भी उन जिलों में शामिल है, जहां यह व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी गई है।


95 प्रतिशत पंजीकरण शुल्क अब ऑनलाइन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नोएडा में रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 95 प्रतिशत पंजीकरण शुल्क अब ऑनलाइन माध्यम से ही जमा हो रहा है। पहले जहां अधिकतर मामलों में शुल्क नकद लिया जाता था, वहीं अब रजिस्ट्री, पट्टा और अनुबंध का पंजीकरण डिजिटल तरीके से किया जा रहा है। बीते कुछ दिनों में 1,138 लोगों ने विभिन्न प्रकार की संपत्तियों की रजिस्ट्री कराई है, जिनमें पंजीकरण शुल्क ऑनलाइन जमा किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित और पारदर्शी रूप से उपलब्ध रहेगा।


पहले दिन तकनीकी खामी से बढ़ी परेशानी
सोमवार से शुरू हुई इस नई व्यवस्था के पहले ही दिन लोगों को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। राजकोष पोर्टल (ट्रेजरी वेबसाइट) काफी समय तक बंद रही, जिससे रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को इंतजार करना पड़ा। पहले दिन तकनीकी समस्या के चलते 572 रजिस्ट्री, पट्टा और अनुबंध का ही पंजीकरण हो सका। दूसरे दिन भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई और 566 मामलों का ही पंजीकरण किया जा सका। हालांकि, इसके बावजूद लोग नई व्यवस्था को लेकर सकारात्मक नजर आए और ऑनलाइन भुगतान को लेकर सहयोग करते दिखे।


प्रशासन बोला—पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम
एआईजी अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि यह व्यवस्था पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि पहले दिन जो तकनीकी समस्या सामने आई, वह ऊपर से संबंधित थी और अब उसे दूर कर लिया गया है। इस नई प्रणाली के पूरी तरह लागू होने से पंजीकरण शुल्क सीधे राजकोष में जमा होगा, जिससे विभागीय कार्यों में भी तेजी और आसानी आएगी। प्रशासन का मानना है कि आने वाले दिनों में यह व्यवस्था पूरी तरह सुचारु हो जाएगी और लोगों को रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों में और अधिक सुविधा मिलेगी।

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