नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारी की मौत से भड़के सहकर्मी, सीईओ लोकेश एम को लिखी चिट्ठी

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नोएडा प्राधिकरण के संस्थागत विभाग में कार्यरत पत्रवाहक गौतम की इलाज न मिलने से मौत हो गई। पैनल अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार के बाद कर्मचारियों में आक्रोश है। एंप्लाइज एसोसिएशन ने चिकित्सा नीति पर सवाल उठाते हुए सीईओ को पत्र लिखा है।

नोएडा प्राधिकरण के संस्थागत विभाग में कार्यरत पत्रवाहक की इलाज न मिलने से हुई मौत के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। इस मामले को लेकर नोएडा एंप्लाइज एसोसिएशन ने प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी जताई है और प्राधिकरण की चिकित्सा नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मृतक कर्मचारी गौतम लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और प्राधिकरण के पैनल में शामिल अस्पतालों से इलाज न मिलने के कारण उनकी जान चली गई।


पैनल के अस्पतालों ने इलाज से किया इनकार
एंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार ने पत्र में बताया कि 11 जनवरी को गौतम की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें नोएडा के कई ऐसे अस्पतालों में लेकर गए, जो नोएडा प्राधिकरण के पैनल में शामिल हैं। आरोप है कि सभी अस्पतालों ने इलाज करने से मना कर दिया। संगठन का कहना है कि प्राधिकरण द्वारा लंबे समय से अस्पतालों के बिलों का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते फंड रिलीज नहीं हुआ और अस्पतालों ने मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया। इस लापरवाही का खामियाजा सीधे कर्मचारी और उसके परिवार को भुगतना पड़ा।


निजी अस्पताल में तोड़ा दम, कर्मचारियों में नाराजगी
इलाज न मिलने के कारण परिजन गौतम को मुरादनगर (गाजियाबाद) के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां 15 जनवरी को उनकी मौत हो गई। कर्मचारी की मौत की खबर मिलते ही नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों में रोष फैल गया। एसोसिएशन ने इसे सिस्टम की विफलता बताते हुए कहा कि अगर समय पर पैनल अस्पतालों में इलाज मिल जाता, तो शायद गौतम की जान बचाई जा सकती थी। कर्मचारियों ने चिकित्सा सुविधा को लेकर तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।


प्राधिकरण ने रखा अपना पक्ष, जांच के दिए आदेश
वहीं, प्राधिकरण के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों की ओर से बिल अत्यधिक आ रहे थे, जिस कारण फाइलों की जांच की जा रही है। अधिकारी के मुताबिक, अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की गई है और उन्हें किसी भी कर्मचारी का इलाज न रोकने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस घटना ने प्राधिकरण की चिकित्सा नीति और कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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