नोएडा हादसे में बड़ी लापरवाही उजागर, इंजीनियर की मौत से पहले भी हो चुका था हादसा, फिर भी नहीं चेता प्राधिकरण

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नोएडा के सेक्टर-150 में युवराज मेहता हादसे से 15 दिन पहले भी ट्रक नाले की दीवार से टकराया था। प्राधिकरण ने न मरम्मत कराई, न सुरक्षा इंतजाम किए। लापरवाही के चलते बाद में युवक की जान चली गई।

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद सामने आई नई जानकारी ने नोएडा प्राधिकरण की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। जिस स्थान पर युवराज की कार नाले में गिरकर डूब गई, ठीक उसी जगह पर 15 दिन पहले भी एक बड़ा हादसा हो चुका था। इसके बावजूद न तो क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत कराई गई और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम किए गए, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह हादसा रोका जा सकता था। बताया जा रहा है कि 31 दिसंबर की रात एक ट्रक अनियंत्रित होकर नाले की दीवार से टकरा गया था। इस टक्कर में नाले की सुरक्षा दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। गनीमत यह रही कि ट्रक दीवार टूटने के बाद वहीं रुक गया और नाले में नहीं गिरा। हादसे की सूचना और तस्वीरें उस समय भी सामने आई थीं, लेकिन इसके बावजूद प्राधिकरण ने इस स्थान को ठीक कराने की कोई पहल नहीं की।


31 दिसंबर की तस्वीरों ने खोली लापरवाही की पोल
अब 31 दिसंबर की रात की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें घने कोहरे के बीच ट्रक के नाले की दीवार से टकराने और दीवार टूटने का साफ दृश्य दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उस समय ट्रक नाले में गिर जाता, तो बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था। इसी क्षतिग्रस्त दीवार के पास 15 दिन बाद युवराज मेहता की कार फिसलकर सीधे पानी से भरे नाले में जा गिरी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हादसे के बाद भी प्राधिकरण ने न तो बैरिकेडिंग कराई, न रिफ्लेक्टर लगाए और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए। कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी और सड़क किनारे टूटी दीवार खतरे को न्योता दे रही थी।


हादसे के बाद हरकत में आया प्राधिकरण
युवराज मेहता की मौत के बाद ही नोएडा प्राधिकरण की नींद टूटी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस मार्ग पर पहले अंधेरा पसरा रहता था, वहां अब आनन-फानन में स्ट्रीट लाइटें लगवाई गई हैं। साथ ही नाले के पास बैरिकेडिंग और अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि ये कदम पहले उठा लिए जाते, तो शायद युवराज की जान बचाई जा सकती थी।

यह मामला अब केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। पहले से हुए हादसे के बावजूद सुधार न करना, और उसके बाद एक युवा इंजीनियर की जान जाना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।


स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाएं। यह हादसा एक चेतावनी है कि समय पर की गई छोटी सावधानी भी किसी की जान बचा सकती है।

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