युवराज जैसी एक और मौत, 10 माह पहले नाले में गिरी थी कार, स्टेशन मास्टर की गई थी जान, तब भी नहीं जागा प्राधिकरण

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ग्रेटर नोएडा में युवराज मेहता की मौत के बाद सामने आया कि 10 महीने पहले स्टेशन मास्टर भरत भाटी भी प्राधिकरण की लापरवाही का शिकार हुए थे। खतरनाक ब्लैक स्पॉट पर बिना बैरिकेडिंग कार नाले में गिर गई थी।

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब सामने आया है कि युवराज की मौत से करीब 10 महीने पहले भी इसी तरह की लापरवाही के चलते एक और व्यक्ति की जान चली गई थी। यह हादसा सेक्टर पी-4 इलाके में हुआ था, जहां रेलवे में स्टेशन मास्टर के पद पर तैनात भरत भाटी की कार एक खतरनाक ब्लैक स्पॉट पर नाले में गिर गई थी।


बिना बैरिकेडिंग और संकेतक के जानलेवा यू-टर्न
दिल्ली के मंडावली निवासी भरत भाटी रेलवे में स्टेशन मास्टर थे। 1 मार्च 2024 को वह फरुखनगर से ग्रेटर नोएडा के रामपुर स्थित अपने पैतृक गांव एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। दोपहर करीब तीन बजे जब वह सेक्टर पी-4 क्षेत्र में पहुंचे, तो वहां आगे का रास्ता अचानक बंद मिला। ठीक सामने गहरा नाला मौजूद था, लेकिन न तो वहां कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही रिफ्लेक्टर, दिशा-सूचक बोर्ड या चेतावनी संकेत लगाए गए थे। अंधेरे और स्पष्ट जानकारी के अभाव में उनकी कार सीधे नाले में जा गिरी और वह वाहन समेत डूब गए।


पुलिस जांच में उजागर हुई प्राधिकरण की लापरवाही
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद भरत भाटी को नाले से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। बाद में जांच में स्पष्ट हुआ कि यह हादसा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की गंभीर लापरवाही का नतीजा था। खतरनाक स्थान होने के बावजूद वहां किसी भी तरह के स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। हादसे के बाद बीटा-2 थाना पुलिस ने अस्थायी रूप से बैरिकेडिंग जरूर कराई, लेकिन प्राधिकरण की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया। कुछ समय बाद रास्ता बंद कर दिया गया, लेकिन चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टर फिर भी नहीं लगाए गए।


युवराज मेहता की मौत के बाद जागा प्राधिकरण
अब जब सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से मौत हुई, तब जाकर प्राधिकरण ने उसी क्षेत्र में दिशा-सूचक बोर्ड और संकेतक लगवाए हैं। इन बोर्डों पर आगे रास्ता बंद होने की सूचना दी गई है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर समय रहते ये इंतजाम किए जाते, तो क्या दो जिंदगियां बचाई जा सकती थीं?


परिजन बोले- जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
मृतक भरत भाटी के भाई दिलीप भाटी ने कहा कि उनके भाई की मौत भी प्राधिकरण की लापरवाही के कारण हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे वाली जगह पहले से ही खतरनाक थी, लेकिन वहां कोई चेतावनी संकेत नहीं था। दिलीप भाटी का कहना है कि ऐसी लापरवाहियों पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह का दर्द न झेले।

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