कंप्यूटर से बैंकों के फ्रीज खातों का डाटा चोरी कर करते थे खेल, नोएडा पुलिस ने दो शातिरों को दबोचा

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नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने पेटीएम पेमेंट बैंक के फ्रीज खातों को अवैध तरीके से डीफ्रीज कर ₹29.97 लाख की ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। मामला आईटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में दर्ज है।

थाना साइबर क्राइम नोएडा पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले का खुलासा करते हुए दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पेटीएम पेमेंट बैंक के फ्रीज और लीन किए गए खातों को अवैध तरीके से डीफ्रीज कराकर करीब 29 लाख 97 हजार रुपये की रकम धोखाधड़ी से रिलीज कराने में शामिल थे। पुलिस ने संकलित सूचना के आधार पर 20/21 जनवरी 2026 की रात कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को जयपुर (राजस्थान) और दूसरे को नोएडा से गिरफ्तार किया है। यह मामला डिजिटल बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा में सेंध लगाने से जुड़ा हुआ है, जिसे पुलिस ने गंभीर आर्थिक अपराध माना है।


बिना अनुमति डीफ्रीज किए गए बैंक खाते, जांच में खुला राज
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में वादी ने 30 अगस्त 2024 को थाना साइबर क्राइम नोएडा में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर मुकदमा संख्या 88/2024 धारा 316(5) बीएनएस और 66, 66सी आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि पेटीएम पेमेंट बैंक से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने कंप्यूटर डेटा की चोरी कर बैंक के उन खातों को डीफ्रीज कर दिया, जो विभिन्न साइबर शिकायतों के चलते फ्रीज या लीन किए गए थे। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी लॉ-इन्फोर्समेंट एजेंसी या न्यायालय की अनुमति के की गई। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि फ्रीज खातों से कुल ₹29,97,059 की राशि को बेईमानी से रिलीज कराया गया। इस पूरे मामले में पहले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अब पुलिस ने इस साइबर नेटवर्क से जुड़े दो और महत्वपूर्ण आरोपियों को दबोच लिया है।


जयपुर और नोएडा से दबोचे गए साइबर अपराधी
गिरफ्तार आरोपियों में पहला नाम राजेश कुमार मीणा का है, जो सवाई माधोपुर, राजस्थान का निवासी है। दूसरा आरोपी सचिन है, जो मूल रूप से सीतापुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है और फिलहाल गौर सिटी, नोएडा में रह रहा था। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी तकनीकी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाते थे और फ्रीज खातों से रकम निकलवाने में अहम भूमिका निभा रहे थे।


नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही पुलिस, आगे और गिरफ्तारियां संभव
साइबर क्राइम पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस धोखाधड़ी में और कौन-कौन लोग शामिल थे और बैंक के अंदर से कितने कर्मचारियों ने इसमें सहयोग किया। पुलिस का दावा है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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