फैक्ट फाइंडिंग में जुटी एसआईटी, नोएडा हादसे में किसकी लापरवाही? सुरक्षा मानक, रिस्पॉन्स टाइम या फिर इंफ्रास्ट्रक्चर जिम्मेदार!

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ग्रेटर नोएडा सेक्टर-150 में युवराज मेहता की मौत मामले में SIT जांच जारी है। 70 फुट गहरे बेसमेंट में गिरने के बाद युवराज 80 मिनट तक जिंदा रहा, लेकिन संसाधनों की कमी और लापरवाही से रेस्क्यू फेल हो गया।

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर एससी-02/150 में 16-17 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवराज की कार एक निर्माणाधीन साइट के करीब 70 फुट गहरे, पानी से भरे अंडरग्राउंड बेसमेंट में जा गिरी थी। हैरानी की बात यह है कि यह गड्ढा कई सालों से इसी खतरनाक हालत में पड़ा था, लेकिन न तो वहां बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। स्थानीय लोगों ने पहले भी इसकी शिकायतें की थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


80 मिनट तक जिंदा रहा युवराज, पिता को किया था कॉल
मुख्य घटना से जुड़े CDR और युवराज के पिता के बयान के अनुसार, कार के पानी में गिरने के बाद युवराज कुछ समय तक जिंदा रहा। उसने अपने पिता को फोन कर पूरी स्थिति बताई और मदद की गुहार लगाई। पिता ने तुरंत डायल-112 पर कॉल किया और खुद भी मौके पर पहुंचे। भारी कोहरा और अंधेरे की वजह से हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। पुलिस को सूचना मिलने के करीब 9 मिनट में टीम मौके पर पहुंच गई, जबकि फायर ब्रिगेड को 30 से 45 मिनट और SDRF को करीब 71 मिनट लगे। NDRF की टीम लगभग दो घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची। इस दौरान युवराज कार की छत पर बैठकर करीब 80 मिनट तक मदद के लिए आवाज देता रहा।


रेस्क्यू में भारी चूक, उपकरण और डाइवर्स नहीं थे मौजूद
बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा संसाधनों की कमी बनी। मौके पर पहुंची किसी भी टीम के पास न तो प्रशिक्षित डाइवर्स थे और न ही 70 फुट गहरे पानी में उतरने के लिए जरूरी उपकरण या लंबी क्रेन उपलब्ध थी। पुलिस और राहत कर्मी लगातार कोहरा, गहराई और निर्माण सामग्री को रेस्क्यू में बाधा बता रहे थे, लेकिन समय पर रणनीतिक योजना न होने से युवराज को बाहर नहीं निकाला जा सका। आखिरकार 91 घंटे बाद कार को बाहर निकाला गया। कार की टूटी विंडशील्ड और खुली सनरूफ जैसे तकनीकी सबूत अब जांच का हिस्सा हैं।


SIT जांच में प्रशासन, प्राधिकरण और बिल्डर की भूमिका पर फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है, जिसे पांच दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। जांच के दो दिन पूरे हो चुके हैं। SIT यह जांच कर रही है कि प्रशासनिक स्तर पर कहां लापरवाही हुई, ड्रेनेज की मरम्मत क्यों नहीं की गई, कंट्रोल रूम और राहत एजेंसियों का रिस्पॉन्स टाइम क्या रहा और मौके पर सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ। इसके साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि जिम्मेदारी प्राधिकरण, प्रशासन, बिल्डर या राहत एजेंसियों में से किसकी है।

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