ग्रेटर नोएडा के इस इलाके में गिरा पानी का जलस्तर, क्या खड़ा हो जाएगा जल संकट? चिंता में हर कोई!

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ग्रेटर नोएडा के दनकौर कस्बे में भूजल स्तर एक साल में 16 फीट गिर गया है। आरओ प्लांट और निर्माण कार्यों से जल संकट गहराने लगा है। लोग प्रशासन से भूजल दोहन पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा के दनकौर कस्बे में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे इलाके में जल संकट के हालात बनने लगे हैं। बीते एक वर्ष के भीतर भूजल स्तर करीब 16 फीट नीचे चला गया है। पहले जहां पानी लगभग 120 फीट की गहराई पर उपलब्ध था, वहीं अब यह 136 फीट तक पहुंच गया है। भूजल स्तर में इस तेज गिरावट ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर घरेलू जलापूर्ति और खेती से जुड़े संसाधनों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में हैंडपंप, समरसेबल और नलकूपों से पर्याप्त पानी नहीं निकल पा रहा है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जूझना पड़ रहा है।


भूगर्भ विभाग ने जताई चिंता
बुधवार को दनकौर पहुंचे भूगर्भ विभाग के अधिकारी आशीष कुमार ने भूजल स्तर की जांच की। उन्होंने बताया कि इतनी कम अवधि में भूजल स्तर का 16 फीट नीचे जाना बेहद गंभीर संकेत है। यह गिरावट दर्शाती है कि इलाके में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है और रिचार्ज के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। अधिकारी ने माना कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। उन्होंने कहा कि भूजल संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना अब जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में दनकौर और आसपास के क्षेत्रों को पानी की भारी किल्लत का सामना न करना पड़े।


आरओ प्लांट और निर्माण कार्य बने बड़ी वजह
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दनकौर और उसके आसपास बड़ी संख्या में आरओ प्लांट लगाए गए हैं, जिनसे भारी मात्रा में भूजल का दोहन हो रहा है। इसके अलावा कस्बे के नजदीक चल रहे बड़े निर्माण कार्य भी जल स्तर गिरने की अहम वजह माने जा रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के दौरान बेसमेंट से लगातार पानी निकाला जा रहा है, जिससे जमीन के भीतर मौजूद जल भंडार तेजी से खाली हो रहा है। लोगों का आरोप है कि इन गतिविधियों पर न तो कोई प्रभावी निगरानी है और न ही भूजल संरक्षण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।


दैनिक जीवन पर दिखने लगा असर
भूजल स्तर में गिरावट का असर अब आम लोगों के जीवन में साफ दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर समरसेबल से पानी बहुत कम निकल रहा है, जबकि नलकूप भी पहले की तुलना में कमजोर हो गए हैं। स्थानीय जल स्रोतों और नालों में भी पानी की मात्रा में उल्लेखनीय कमी दर्ज की जा रही है। पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड का कहना है कि दनकौर से कुछ दूरी पर बिल्डरों द्वारा बेसमेंट से भारी मात्रा में पानी निकाला जा रहा है। इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और आरओ प्लांट व निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि आने वाले समय में जल संकट से बचा जा सके।

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