युवराज मेहता को बचाने की कोशिश करने वाले युवक के साथ खड़े किसान, कहा- पुलिस ने दबाव बनाया तो ठीक नहीं होगा
- Shiv Kumar
- 22 Jan, 2026
ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय युवराज मेहता की दर्दनाक मौत का मामला अब केवल हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। युवराज की मौत को लेकर जहां प्रशासन की अनदेखी पर उंगलियां उठ रही हैं, वहीं उसे बचाने की कोशिश करने वाले मनिंदर पर दबाव बनाए जाने के आरोप सामने आए हैं। इसी के विरोध में किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने खुलकर मनिंदर के समर्थन में मोर्चा संभाल लिया है। संगठन का कहना है कि मनिंदर ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अपनी जान जोखिम में डालकर युवराज को बचाने का प्रयास किया, लेकिन अब उसी पर दबाव बनाकर प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास कर रहा है।
जान बचाने वाले पर दबाव निंदनीय: किसान नेता
किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनिंदर ने वह किया, जो मौके पर मौजूद जिम्मेदार तंत्र को करना चाहिए था। सुखबीर खलीफा ने कहा कि मनिंदर ने युवराज को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी, ऐसे व्यक्ति के साथ संगठन तन, मन और धन से खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जान के रक्षक को ही सवालों के घेरे में खड़ा किया जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि समाज में ऐसे लोगों को हतोत्साहित किया जाएगा, तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति संकट के समय आगे आने से डरेगा।
प्रशासन अपनी नाकामी छुपा रहा है: डॉक्टर रुपेश वर्मा
किसान संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य डॉक्टर रुपेश वर्मा ने कहा कि शासन और प्रशासन अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति ने जान बचाने का साहसिक कार्य किया, उसी पर दबाव बनाना पूरी तरह निंदनीय है। यह प्रशासन की सोच को दर्शाता है कि वह किस तरह का उदाहरण समाज के सामने रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस तरह की कार्यशैली प्रशासन के लिए ही घातक साबित होगी और जनता के बीच अविश्वास बढ़ाएगी।
डेढ़ घंटे तक डूबता रहा युवक, जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
किसान संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जब युवराज करीब डेढ़ घंटे तक डूबता रहा, तब मौके पर मौजूद पुलिस, अग्निशमन विभाग और जिलाधिकारी के अधीन एसडीआरएफ की जिम्मेदारी कौन तय करेगा। उन्होंने कहा कि यदि युवराज किसी बड़े या रसूखदार व्यक्ति का बेटा होता, तो क्या उसे दो घंटे के भीतर हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट नहीं कराया जाता। यह सवाल सिर्फ प्रशासन से नहीं, बल्कि मीडिया से भी है कि वह ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासन से जवाबदेही क्यों नहीं तय करता। संगठन ने साफ किया कि मनिंदर, जो गढ़ी समस्तीपुर गांव का रहने वाला है, ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के बावजूद उसने अदम्य साहस दिखाया। किसान संघर्ष मोर्चा ने ऐलान किया कि वह हर परिस्थिति में मनिंदर के साथ खड़ा रहेगा और प्रशासन को वास्तविक सच्चाई सामने लानी ही होगी।
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