नोएडा में युवराज की मौत प्राधिकरण को दे गई सीख, अब 55 ब्लैक स्पॉट किए गए मार्क, ड्रेनेज सिस्टम का सर्वे शुरू
- Shiv Kumar
- 28 Jan, 2026
युवराज की दर्दनाक मौत ने नोएडा शहर की रोड सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। प्राधिकरण ने शहरभर में सर्वे कर ऐसे 65 रोड सेफ्टी पॉइंट्स की पहचान की है, जहां सड़क किनारे स्थित प्लाटों में वॉटर लॉगिंग, खुले बेसमेंट या खुदाई तो है, लेकिन सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नदारद हैं। इन स्थानों पर न तो बैरिकेडिंग है और न ही कोई चेतावनी संकेतक। प्राधिकरण ने इन सभी पॉइंट्स को गंभीर श्रेणी में रखते हुए तय समयसीमा में सुधार कराने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाए।
50 पॉइंट डेवलपर्स के, अब नहीं मिलेगी कोई ढील
प्राधिकरण के सर्वे में यह साफ हुआ है कि चिन्हित 65 रोड सेफ्टी पॉइंट्स में से 50 सीधे तौर पर निजी डेवलपर्स से जुड़े हुए हैं। इन जगहों पर सड़क सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का भी पालन नहीं किया गया है। न रिफ्लेक्टर लगे हैं, न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग और न ही सुरक्षित रोड डिजाइन। प्राधिकरण ने साफ शब्दों में कहा है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित डेवलपर्स को 3 से 5 दिन का समय देकर नोटिस जारी किया जाएगा। तय अवधि में काम पूरा न होने पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि युवराज की मौत ने सिस्टम को झकझोर दिया है और अब सख्ती जरूरी है।
15 स्थानों पर प्राधिकरण खुद संभालेगा मोर्चा
सर्वे के दौरान 15 ऐसे रोड सेफ्टी पॉइंट्स भी सामने आए हैं, जिनकी जिम्मेदारी सीधे नोएडा प्राधिकरण की है। इन स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग, रोड साइनेज, रिफ्लेक्टर, स्ट्रीट लाइट और रोड मार्किंग जैसे जरूरी इंतजाम खुद प्राधिकरण कराएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए। प्राधिकरण का मानना है कि यदि समय रहते इन खामियों को दूर कर दिया जाए, तो कई बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इन इलाकों में लगातार निगरानी भी रखी जाएगी, ताकि भविष्य में फिर से लापरवाही न हो।
ड्रेनेज सिस्टम भी बनेगा फोकस, पूरे शहर का होगा सर्वे
युवराज की मौत के बाद प्राधिकरण ने सिर्फ सड़कों ही नहीं, बल्कि ड्रेनेज और जलभराव की समस्या पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। शहर के 20 गांवों में संपवेल और ड्रेनेज सिस्टम सुधारने की योजना बनाई गई है। इनमें से 7 गांवों के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी पर प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा पूरे नोएडा शहर का व्यापक ड्रेनेज सर्वे कराने का फैसला लिया गया है। इस सर्वे में जलभराव वाले इलाकों, कमजोर ड्रेनेज पॉइंट्स और ओवरफ्लो जोन की पहचान की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अब हादसों के बाद नहीं, बल्कि पहले ही खतरे को पहचानकर कार्रवाई की जाएगी।
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