NGT ने तालाब अधिग्रहण पर YEIDA से मांगा जवाब, पूछा- किस आधार पर जलस्रोतों का अधिग्रहण किया गया?

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NGT ने जेवर एयरपोर्ट के लिए तालाबों के अधिग्रहण और वैकल्पिक जलस्रोत निर्माण पर सख्त रुख अपनाया है। YEIDA और यूपी सरकार से 2016 के आदेश का वैधानिक आधार मांगा गया है। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के लिए तालाबों के अधिग्रहण और उनके बदले बनाए गए वैकल्पिक जलस्रोतों के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) और उत्तर प्रदेश सरकार से साफ कहा है कि वे यह स्पष्ट करें कि तालाबों का अधिग्रहण किन वैधानिक प्रावधानों के तहत किया गया और किस कानून के आधार पर उनके स्थान पर नए जलस्रोत बनाने की अनुमति दी गई। इस मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।


2016 के सरकारी आदेश पर उठे सवाल

NGT की प्रिंसिपल बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे हैं, ने चार सप्ताह के भीतर 3 जून 2016 के उस सरकारी आदेश की प्रति दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत तालाबों के स्थानापन्न की अनुमति दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य सरकार को ऐसा आदेश जारी करने का वैधानिक अधिकार किस अधिनियम या नियम के तहत प्राप्त है। बेंच ने संकेत दिया कि केवल विकास परियोजना के नाम पर प्राकृतिक जलस्रोतों को खत्म करना स्वीकार्य नहीं है, जब तक उसके पीछे ठोस कानूनी आधार न हो।


वेटलैंड्स को नुकसान का आरोप, YEIDA का पक्ष

यह मामला गौतमबुद्ध नगर जिले में वेटलैंड्स और तालाबों को कथित नुकसान से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जेवर एयरपोर्ट समेत कई बड़ी परियोजनाओं के चलते स्थानीय जलस्रोत और आर्द्रभूमियां खत्म की जा रही हैं। सुनवाई के दौरान YEIDA ने ट्रिब्यूनल को बताया कि एयरपोर्ट परियोजना के लिए आठ तालाबों का अधिग्रहण किया गया था, जिनका कुल क्षेत्रफल 2.18 हेक्टेयर था। इसके बदले करीब 6.41 हेक्टेयर क्षेत्र में आठ कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं, जो निर्धारित मानक से लगभग तीन गुना अधिक हैं। प्राधिकरण का दावा है कि यह कार्रवाई सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हालांकि, NGT ने स्पष्ट किया कि केवल वैकल्पिक तालाब बना देना पर्याप्त नहीं है। ट्रिब्यूनल ने 2020 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ‘जितेंद्र सिंह बनाम पर्यावरण मंत्रालय’ का हवाला देते हुए कहा कि 2016 का यूपी सरकार का आदेश संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ माना जा चुका है और इसे निरस्त किया जा सकता है। ऐसे में तालाबों के स्थानापन्न की वैधता की गहन जांच जरूरी है।


तालाब संरक्षण पर रिपोर्ट और नोएडा प्राधिकरण पर जुर्माना

NGT ने जिले में तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर विकास प्राधिकरणों की रिपोर्ट भी तलब की। GNIDA ने बताया कि उसके क्षेत्र में 281 तालाब हैं, जिनमें से अधिकांश पर काम पूरा हो चुका है या चल रहा है, जबकि करीब 50 तालाब अतिक्रमण से प्रभावित हैं। YEIDA ने सदर तहसील में 69 और जेवर तहसील में 200 तालाब होने की जानकारी दी। प्रगति रिपोर्ट संतोषजनक न होने पर NGT ने नोएडा प्राधिकरण पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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