नोएडा हादसा: तीनों विभागों की रिपोर्ट्स ही पड़ सकती हैं अधिकारियों पर भारी, दावों में अंतर से लटकी कार्रवाई की तलवार
- Shiv Kumar
- 30 Jan, 2026
नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ा प्रशासनिक उलझाव सामने आया है। शासन की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को पुलिस, जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण द्वारा सौंपी गई रिपोर्टों में गंभीर अंतर मिला है। अलग-अलग विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयानों में समय, मौके पर पहुंचने और राहत-बचाव कार्य को लेकर साफ विरोधाभास दिख रहा है। इसी कारण कई अधिकारी अब संभावित कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। एसआईटी ने पांच दिनों तक नोएडा में रहकर हर पहलू से जांच की और अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभागों में हलचल तेज हो गई है।
तीनों विभागों के दावों में समय और मौजूदगी को लेकर फर्क
जांच में सामने आया है कि पुलिस की रिपोर्ट में सबसे पहले खुद के मौके पर पहुंचने का दावा किया गया है। इसके अनुसार पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) ने अन्य राहत-बचाव एजेंसियों को सूचना दी। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि दूसरे विभागों की टीमें देरी से पहुंचीं। इसी बीच एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि युवराज की मौत पहले ही हो चुकी थी।
रिपोर्ट में गड्ढे से दिख रही रोशनी को कार की हेडलाइट बताया गया है। इसके अलावा युवराज को बचाने का प्रयास करने वाले मोनिंदर की लोकेशन घटनास्थल से दूर बताई गई, जबकि मोनिंदर खुद मौके पर मौजूद होने का दावा कर रहा है। राहत-बचाव से जुड़े कुछ कर्मचारियों के बयान भी मोनिंदर के पक्ष में दर्ज किए गए हैं, जिससे मामला और उलझ गया है।
करीब 150 लोगों के बयान, दो बार किया घटनास्थल का दौरा
एसआईटी ने जांच के दौरान पुलिस, जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ-साथ चश्मदीदों को मिलाकर लगभग 150 लोगों के बयान दर्ज किए। टीम ने दो बार घटनास्थल का निरीक्षण भी किया। जांच में निर्माणाधीन बेसमेंट, सुरक्षा व्यवस्था और सूचना तंत्र की भूमिका को बारीकी से परखा गया। एसआईटी सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में लापरवाही के कई बिंदुओं को चिह्नित किया गया है। इनमें समय पर सूचना साझा न होना, समन्वय की कमी और मौके पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
अगले सप्ताह हो सकती है कार्रवाई, अफसरों की बढ़ी बेचैनी
रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद से संबंधित विभागों में माहौल बदला हुआ है। लगातार इस बात की चर्चा है कि किन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। सूत्रों का कहना है कि आगामी सप्ताह में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस बीच कई अधिकारी कार्रवाई से बचने के लिए पैरवी में जुट गए हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक संपर्क साधे जा रहे हैं। युवराज मेहता की मौत का यह मामला अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






