स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई पर पर बड़ा एक्शन, जेल अधीक्षक निलंबित, कोर्ट ने किया तलब
नोएडा के स्क्रैप माफिया रवि काना को लेकर पूरे यूपी में हलचल मच गई है। बी-वारंट के बावजूद उसे बांदा जेल से रिहा कर दी गई है। इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उन्हें कोर्ट ने तलब किया है।
- Shiv Kumar
- 31 Jan, 2026
गौतमबुद्धनगर की अदालत में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और न्यायिक आदेशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए दरअसल नोएडा के सेक्टर 63 थाने में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले में नामजद स्क्रैप माफिया रवि काना को बी वारंट जारी होने के बावजूद जिला कारागार बांदा से रिहा कर दिया गया है, इस पूरे घटनाक्रम को मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट सीजीएम गौतम बुद्ध नगर ने गंभीर लापरवाही मानते हुए जेल अधीक्षक बांदा से स्पष्टीकरण तलब किया।
बी वारंट के बावजूद कैसे हुई रिहाई
न्यायालय के आदेश के अनुसार 29 जनवरी 2026 को आरोपी को बी वारंट के तहत अदालत में पेश किया गया लेकिन हैरानी की बात तब सामने आई जब उसी दिन शाम को जिला कारागार बांदा से आरोपी रवि काना को रिहा कर दिया गया जबकि नोएडा के केस में ना तो उसकी न्यायिक रिमांड पूरी हुई थी और ना ही अदालत की ओर से कोई स्पष्ट रिहाई का आदेश जारी किया गया था।अदालत ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा है की जेल प्रशासन को यह जानकारी थी कि आरोपी नोएडा के केस में बी वारंट पर तालब है लेकिन इसके बावजूद उसे किन परिस्थितियों में छोड़ा गया यह किस आधार पर उसकी रिहाई की यह पूरी तरह से मामला अस्पष्ट है।
जेल अधीक्षक ने अदालत से पूछे तीन सवाल
मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट ने जिला कारागार बांदा की जेल अधीक्षक से तीन अहम बिंदु पर स्पष्ट जवाब मांगा है पहले जब जेल प्रशासन को यह जानकारी थी कि आरोपी बी वारंट पर तालाब है तो उसे रिहा क्यों किया गया दूसरा न्यायालय में किसी भी प्रकार की रिहाई का आदेश प्राप्त हुए बिना किसी नियम या प्रक्रिया के तहत आरोपी को छोड़ा गया तीसरा क्या इस कृत्य को आरोपी को कस्टडी से बाहर जाने देनी जैसी गंभीर चुक माना जाना चाहिए और क्यों ना इस मामले में जेल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जाए अदालत ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए है कि वह 6 फरवरी 2026 तक पूरे मामले में शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी दें।
न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
इस प्रकरण में जेल प्रशासन की जिम्मेदारी और न्यायिक आदेशों के पालन की गंभीरता को एक बार फिर सामने ला दिया है।कानून के जानकारो का कहना है की बी वारंट जारी होने के बाद आरोपी को तब तक जेल से नहीं छोड़ा जा सकता जब तक संबंधित अदालत की स्पष्ट अनुमति न हो ऐसे में आरोपी की रिहाई न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है बल्कि पुलिस और अदालत की कार्रवाई को भी कमजोर करती है
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