'सहमति से बने फिजिकल रिलेशन अपराध नहीं', नोएडा के एक मामले में हाई कोर्ट की टिप्पणी, केस खारिज

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से बने संबंध को बाद में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। नोएडा मामले में धारा-69 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द की गई, जबकि अन्य आरोपों की जांच जारी रखने के आदेश दिए गए हैं।

प्रयागराज/नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध को बाद में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि रिश्ते टूटने के बाद उत्पन्न निराशा को आपराधिक धोखाधड़ी का रूप नहीं दिया जा सकता। यह टिप्पणी नोएडा में दर्ज एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक युवती ने शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपी युवक ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की मांग की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया।


धोखे से बनाए गए संबंध ही अपराध की श्रेणी में आते हैं
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-69 का उद्देश्य केवल उन मामलों को दंडित करना है, जहां शुरुआत से ही शादी का इरादा न होकर धोखे से संबंध बनाए गए हों। कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से रिश्ते में थे और बाद में किसी कारण रिश्ता टूट गया, तो इसे आपराधिक धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल रिश्ता टूटने के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाना कानून की मंशा के खिलाफ है।


नोएडा में दर्ज केस की पृष्ठभूमि पर कोर्ट की टिप्पणी

मामला नोएडा के सेक्टर-63 थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें युवती ने युवक पर धमकी देने, मारपीट करने और शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाने का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने कोर्ट में सगाई, शादी की तारीख तय होने और होटल व अन्य बुकिंग के दस्तावेज पेश किए। कोर्ट ने माना कि शादी की तैयारियां वास्तव में चल रही थीं और बाद में आपसी मनमुटाव के कारण रिश्ता टूटा। इसलिए इसे पीछे की तारीख से धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता।


धारा-69 के तहत एफआईआर रद्द, अन्य आरोपों की जांच जारी
अदालत ने कहा कि धारा-69 तभी लागू होती है जब शुरुआत से ही शादी का कोई इरादा न हो और केवल संबंध बनाने के लिए झूठा वादा किया गया हो। इस आधार पर कोर्ट ने संबंधित धारा के तहत दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। हालांकि, धमकी देने और हमले जैसे अन्य आरोपों की जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले को रिश्तों और आपसी सहमति से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता के रूप में देखा जा रहा है।

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