युवराज मौत मामले में बड़ा अपडेट, हाईकोर्ट ने बिल्डर अभय कुमार को दी जमानत, कहा- गलत तरीके से गिरफ्तारी

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नोएडडा के युवराज केस में गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियां पाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिल्डर अभय कुमार की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। यह गंभीर कानूनी चूक है और ऐसी गिरफ्तारी वैध नहीं मानी जा सकती।

नोएडा हादसे में युवराज मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस की कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए याचिकाकर्ता अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। एमजेड बिजटाउन के निदेशक अभय कुमार ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनकी गिरफ्तारी अवैध तरीके से की गई है और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान यह पाया कि गिरफ्तारी मेमो की अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिससे पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया ही संदिग्ध हो गई।


गिरफ्तारी प्रक्रिया में लापरवाही को बताया गंभीर चूक
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के दौरान तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना संविधान के अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सुरक्षा मानकों का पालन पुलिस के लिए अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के समय पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा की गई प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां पाई गईं, जिसके चलते अभय कुमार की हिरासत को वैध नहीं ठहराया जा सकता।


रिमांड आदेश भी घोषित हुआ अवैध
हाईकोर्ट ने इस मामले में गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 20 और 21 जनवरी 2026 को दिए गए रिमांड आदेशों को भी अवैध करार दिया। कोर्ट ने कहा कि जब गिरफ्तारी ही कानून के अनुरूप नहीं हुई तो उसके आधार पर दिया गया रिमांड आदेश भी स्वतः अवैध हो जाता है। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी तुरंत अभय कुमार को रिहा करें। इससे पहले निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और अगली सुनवाई की तारीख भी तय की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की दिशा बदल गई है।


अरेस्ट मेमो की क्लॉज-13 का पालन नहीं किया गया
अभय कुमार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि गिरफ्तारी के समय न तो अरेस्ट मेमो की प्रति दी गई और न ही उसमें शामिल क्लॉज-13 का पालन किया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के तहत अनिवार्य है। कोर्ट ने हाल ही में दिए गए उमंग रस्तोगी मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी गंभीर चूक है। इस बीच, इसी मामले में लोटस ग्रीन के कर्मचारियों रवि बंसल और सचिन करनवाल को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट भी निरस्त किया जा चुका है।

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