नोएडा पुलिस को हाईकोर्ट से लगा तगड़ा झटका, लापरवाही पर भेजा अवमानना नोटिस, मामला जानकर आप कहेंगे- बढ़िया फैसला!
- Shiv Kumar
- 06 Feb, 2026
नोएडा। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा के थाना सेक्टर-113 पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों से एक माह के भीतर जवाब लेकर अदालत को अवगत कराया जाए। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं। इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है और पूरे मामले पर प्रशासनिक स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
क्या है विवाद और याचिकाकर्ताओं का आरोप
मामला सौहरखा गांव में जमीन विवाद से जुड़ा है, जहां 1 अगस्त 2023 को कथित रूप से मारपीट की घटना हुई। पीड़ित पक्ष ने तत्काल यूपी-112 सेवा पर कॉल कर मदद मांगी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि संज्ञेय अपराध होने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और उल्टे पीड़ितों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया। अदालत में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि यह कार्रवाई प्रभावशाली भूमाफिया के दबाव में की गई। मुख्य याची रवि यादव ने कहा कि इस पूरे विवाद और मुकदमेबाजी से उनका परिवार मानसिक रूप से टूट गया और उनके पिता भी तनाव में आ गए, जिससे परिवार को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
RTI के खुलासे से बढ़ी पुलिस की मुश्किलें
मामले में दायर आरटीआई से सामने आया कि यूपी-112 की पीआरवी टीम घटना स्थल पर पहुंची थी और दोनों पक्षों को थाने ले जाया गया था, लेकिन थाना रिकॉर्ड में घटना का कोई उल्लेख नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि घटना से जुड़े साक्ष्यों को दर्ज न करना और रिकॉर्ड में विसंगतियां अधिकारियों की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है। अदालत ने इस विरोधाभास को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। इस खुलासे के बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।
अदालत के आदेश के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर
5 फरवरी 2026 को पारित आदेश में उच्च न्यायालय ने सरकारी पक्ष को निर्देश दिया है कि एक महीने के भीतर संबंधित अधिकारियों का जवाब पेश किया जाए। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई संभव है। वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल कानूनी नहीं बल्कि सम्मान और न्याय की भी है। इस मामले ने पुलिस कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस भी छेड़ दी है।
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