फर्जी कागज बनवाकर कर दिया बड़ा कांड, अब कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने सिखाया सबक, पूरा मामला जान शॉक्ड हो जाएंगे आप!
- Shiv Kumar
- 06 Feb, 2026
ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-1 कोतवाली क्षेत्र में करोड़ों रुपये कीमत के आबादी भूखंड को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने का मामला सामने आया है। बुलंदशहर के लुहारली गांव निवासी सुरेंद्र और मुखराज ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार को अधिग्रहित जमीन के बदले प्राधिकरण से मिला प्लॉट धोखाधड़ी कर दूसरों के नाम दर्ज करा लिया गया। पीड़ित पक्ष ने बताया कि उनके पिता प्यारेलाल ने वर्षों पहले चूहड़पुर गांव में जमीन खरीदी थी, जिसे बाद में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अधिग्रहित किया और मुआवजे के साथ 5 प्रतिशत आबादी भूखंड के तहत करीब 1260 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया गया था। लंबे समय तक न्याय न मिलने के बाद मामला कोर्ट पहुंचा, जिसके आदेश पर अब पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी दस्तावेज बनाकर प्लॉट हड़पने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि चूहड़पुर गांव के रहने वाले सतीश कसाना और हरीश कसाना ने कथित तौर पर फर्जी कागजात तैयार कर करोड़ों रुपये मूल्य के प्लॉट को अपने नाम दर्ज करा लिया। पीड़ित परिवार को जब इस हेराफेरी की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसका विरोध किया। आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। परिवार का कहना है कि प्लॉट उनके पिता को वैधानिक प्रक्रिया के तहत आवंटित हुआ था, लेकिन दस्तावेजों में हेरफेर कर स्वामित्व बदल दिया गया। इस पूरे मामले से इलाके में भी चर्चा तेज हो गई है और जमीन संबंधी धोखाधड़ी के मामलों पर फिर सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने पहले स्थानीय पुलिस और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई बार शिकायत करने के बाद भी सुनवाई न होने पर आखिरकार उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। इसके बाद इकोटेक-1 कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया। इस कार्रवाई के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है और पुलिस जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।
पुलिस ने जांच शुरू की, दस्तावेज खंगाले जा रहे
कोतवाली प्रभारी अरविंद वर्मा के अनुसार, अदालत के निर्देश पर मामला दर्ज कर लिया गया है और सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। प्राधिकरण रिकॉर्ड और भूमि आवंटन से जुड़े कागजात की भी जांच होगी ताकि स्वामित्व की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और दस्तावेजी हेराफेरी की समस्या को उजागर किया है, जिससे आम लोगों में भी चिंता बढ़ी है।
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