रौनीजा अंडरपास पर किसान महापंचायत, मुआवजे पर बड़ी सहमति, अन्य कई मुद्दों पर हुई चर्चा

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गौतमबुद्ध नगर के रौनीजा अंडरपास पर आयोजित किसान महापंचायत में यमुना एक्सप्रेस-वे प्रभावित किसानों को 64.7% अतिरिक्त मुआवज़ा देने की घोषणा हुई। गांव-गांव कैंप लगाकर भुगतान शुरू होगा और बाकी समस्याओं पर प्रशासन से जल्द वार्ता का आश्वासन मिला।

गौतमबुद्ध नगर में किसानों की लंबी लड़ाई के बीच गौतमबुद्ध नगर के रौनीजा अंडरपास पर आयोजित किसान–मजदूर महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान, मज़दूर और नौजवान जुटे। लंबे समय से जमीन और मुआवजे से जुड़ी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों को इस पंचायत में अहम भरोसा मिला। पंचायत शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में आयोजित हुई, जहां किसानों की जमीन, मजदूरों के अधिकार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय किसान यूनियन (कृषक शक्ति) के नेताओं ने कहा कि संगठन तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक किसानों की सभी जायज़ मांगों पर ठोस समाधान लागू नहीं हो जाता।


महापंचायत में मुआवज़े को लेकर बड़ी घोषणा
महापंचायत के दौरान सबसे अहम घोषणा यमुना एक्सप्रेस-वे परियोजना से प्रभावित किसानों के लिए अतिरिक्त 64.7 प्रतिशत मुआवज़ा भुगतान को लेकर की गई। बताया गया कि आगामी 28 फरवरी से गांव-गांव कैंप लगाकर किसानों को यह अतिरिक्त मुआवज़ा वितरित किया जाएगा, जिससे लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान शुरू होगा। पंचायत में शामिल किसानों ने इसे अपनी एक बड़ी जीत बताया। किसान नेताओं का कहना था कि यह केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान और अधिकार की बहाली का कदम है। साथ ही प्रशासन और सरकार से अन्य लंबित समस्याओं पर भी जल्द समाधान की मांग रखी गई।


प्रशासन से वार्ता और ज्ञापन सौंपकर मांगा स्थायी समाधान
महापंचायत के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम, एसडीओ सहित संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण, रोजगार, मुआवज़ा वितरण और अन्य स्थानीय समस्याओं को शामिल किया गया। अधिकारियों ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसान संगठनों ने बताया कि शेष मुद्दों को लेकर जल्द ही उच्च स्तर पर शासन और प्रशासन के साथ वार्ता कराई जाएगी। किसानों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं बल्कि समयबद्ध समाधान चाहते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा खड़ी न हों।


किसान–मज़दूर एकता को मिली नई मजबूती
पंचायत में बड़ी संख्या में शामिल युवाओं और मज़दूरों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। वक्ताओं ने कहा कि किसानों और मज़दूरों के मुद्दे अलग नहीं बल्कि जुड़े हुए हैं। पंचायत को केवल विरोध कार्यक्रम नहीं बल्कि अधिकारों की निर्णायक लड़ाई का पड़ाव बताया गया। संगठन के नेताओं ने दावा किया कि यह एकजुटता आगे भी जारी रहेगी और जब तक सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, संघर्ष जारी रहेगा। पंचायत के बाद किसानों में उत्साह और उम्मीद दोनों देखने को मिली।

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