नोएडा में नए तरीके का फ्रॉड, खाते से उड़ा दिए डेढ़ लाख रुपये, धोखाधड़ी का तरीका जान दंग रह जाएंगे आप
- Shiv Kumar
- 09 Feb, 2026
नोएडा में साइबर ठगों ने एक युवक को केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर झांसे में लेकर उसके बैंक खाते से 1.37 लाख रुपये निकाल लिए। मामला सेक्टर-49 थाना क्षेत्र का है, जहां हिंडन विहार सोसाइटी निवासी आशुतोष दुबे ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित के मुताबिक, एक कॉल के जरिए उन्हें बैंक अधिकारी बनकर संपर्क किया गया और केवाईसी अपडेट कराने की प्रक्रिया बताई गई। जैसे ही उन्होंने बताए गए नंबर पर कॉल किया, कुछ ही देर में खाते से रकम ट्रांसफर हो गई। अब पुलिस और साइबर सेल मामले की जांच में जुटी है।
केवाईसी अपडेट के बहाने जाल में फंसाया गया
पीड़ित आशुतोष दुबे ने पुलिस को बताया कि 5 फरवरी को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया, जिसने खुद को बैंक अधिकारी बताया। कॉलर ने कहा कि बैंक खाते की केवाईसी अपडेट नहीं होने पर दिक्कत आ सकती है और प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक नंबर पर कॉल करना जरूरी है। भरोसा कर उन्होंने उस नंबर पर कॉल कर दिया। इसके तुरंत बाद उनके मोबाइल पर बैंक से जुड़े मैसेज आने लगे। कुछ ही मिनटों में खाते से 1.37 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर हो गए। जब रकम कटने की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
मोबाइल हैक कर निकाली गई रकम
पीड़ित का दावा है कि ठगों ने तकनीकी तरीके से उनका मोबाइल हैक कर बैंक खाते तक पहुंच बनाई। उनका कहना है कि उन्होंने किसी को भी बैंक की गोपनीय जानकारी साझा नहीं की, फिर भी खाते से रकम निकल गई। पुलिस का कहना है कि साइबर ठग अक्सर कॉल या लिंक के जरिए मोबाइल तक पहुंच बना लेते हैं और इसी का फायदा उठाकर बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं। मामले में सेक्टर-49 थाने में केस दर्ज कर लिया गया है और तकनीकी जांच जारी है।
ट्रांजेक्शन से जुड़े खातों की हो रही जांच
साइबर सेल अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले संदेशों से सावधान रहें। अगर किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी का प्रयास हो, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और नजदीकी थाने को भी सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और रकम रिकवर करने की संभावना बनी रहे।
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