ग्रेटर नोएडा में बड़ा हादसा, ईंटों से भरी ट्रॉली पलटी, मलबे में दबे दो बच्चे गंभीर घायल

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ग्रेटर नोएडा के रौनीजा गांव में ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से खेल रहे दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत बचाव कर अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद गांव में सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंता और नाराजगी बढ़ गई है।

ग्रेटर नोएडा के रौनीजा गांव में रविवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जब ईंटों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। उस समय सड़क किनारे कुछ बच्चे खेल रहे थे, तभी ट्रॉली का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे बच्चों की ओर पलट गई। हादसे के दौरान अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके की ओर दौड़े। घटना में दो बच्चे ट्रॉली से गिरी ईंटों के नीचे दब गए, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल बन गया।


खेलते समय अचानक हुआ हादसा, मलबे में दब गए बच्चे

जानकारी के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के रौनीजा गांव में एक ट्रैक्टर ईंटों से भरी ट्रॉली लेकर गुजर रहा था। इसी दौरान किसी कारण से चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और ट्रॉली सड़क किनारे पलट गई। वहीं पास में खेल रहे 8 वर्षीय भूपेंद्र और 11 वर्षीय मानव ईंटों के मलबे के नीचे दब गए। घटना होते ही आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को बाहर निकाला। हादसे के समय बच्चों की चीख सुनकर परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया।


गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती, पुलिस को नहीं मिली सूचना

घटना के बाद परिजन और ग्रामीण घायल बच्चों को बुलंदशहर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां दोनों का इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है और लगातार निगरानी में रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से अक्सर खतरा बना रहता है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। वहीं, रबूपुरा कोतवाली प्रभारी श्याम बाबू शुक्ल ने बताया कि उन्हें इस घटना की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। हालांकि स्थानीय लोग प्रशासन से गांव के भीतर भारी वाहनों के संचालन पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।


ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग

हादसे के बाद गांव के लोगों में नाराजगी भी देखी गई। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री से भरे ट्रैक्टर और ट्रॉली अक्सर तेज गति से गांव के भीतर गुजरते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव की आबादी वाले क्षेत्रों में भारी वाहनों की गति सीमा तय की जाए और बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते राहत कार्य न होता तो हादसा और गंभीर हो सकता था। फिलहाल गांव में बच्चों की हालत को लेकर चिंता बनी हुई है।

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