नोएडा में ट्विन टावर तोड़ने का मामला, विजिलेंस ने मांगी विभागीय जांच की फाइल, अधिकारियों और कर्मचारियों के मांगे नाम
- Shiv Kumar
- 14 Feb, 2026
नोएडा का बहुचर्चित सुपरटेक ट्विन टावर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शासन के निर्देश पर चल रही लखनऊ विजिलेंस की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके साथ ही प्राधिकरण के कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पुराने निर्णयों और विभागीय कार्यवाहियों की फाइलें भी दोबारा खंगाली जा रही हैं। हाल ही में विजिलेंस टीम ने प्राधिकरण से विभागीय जांच से जुड़े दो अहम बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है, जिसके बाद विभाग के भीतर हलचल तेज हो गई है और अधिकारी जवाब तैयार करने में जुट गए हैं।
विभागीय जांच पर मांगा गया पूरा रिकॉर्ड
विजिलेंस ने प्राधिकरण से पूछा है कि टावर निर्माण और उससे जुड़े मामलों में किन-किन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी और किन मामलों में जांच पूरी कर बंद कर दी गई। इसके साथ संबंधित आदेशों और दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई हैं। इन सवालों के सामने आते ही प्राधिकरण के विभिन्न विभागों में पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जवाब तैयार करने के लिए कई स्तरों पर बैठकों का दौर चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई संभव है, जिससे कई अफसरों पर जिम्मेदारी तय हो सकती है।
विजिलेंस टीम पहले भी कर चुकी है दस्तावेजों की जांच
इससे पहले 3 फरवरी को लखनऊ से आई विजिलेंस टीम ने नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर नोडल अधिकारी से मुलाकात की थी। टीम ने ट्विन टावर ध्वस्तीकरण से जुड़े अहम दस्तावेजों की मांग की थी, जिसमें कार्य योजना, आदेश पत्र और कार्रवाई से संबंधित रिकॉर्ड शामिल थे। इन दस्तावेजों की जांच के बाद अब विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेज व्यवस्थित कर विजिलेंस को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि जांच प्रक्रिया बिना देरी आगे बढ़ सके और सभी तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की नींव तब पड़ी जब सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को ट्विन टावर गिराने के साथ-साथ निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, जिसकी रिपोर्ट में कई अधिकारियों, कंपनी निदेशकों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठे। इसी आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। अब विजिलेंस जांच अंतिम चरण में पहुंचने के साथ पूरे प्रकरण में फिर से हलचल बढ़ गई है।
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