जेवर एयरपोर्ट जमीन अधिग्रहण के लिए सरकार ने खोला खजाना, फॉरमेलिटी पूरी करने में किसानों का छूटा पसीना
- Shiv Kumar
- 16 Feb, 2026
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तीसरे चरण के लिए सरकार ने मुआवजे की रकम जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दी है, लेकिन किसानों को भुगतान लेने से पहले जरूरी कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन गांव-गांव पहुंचकर किसानों को फाइलें उपलब्ध करा रहा है, फिर भी भार मुक्त प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज जुटाने में काफी समय लग रहा है। किसानों का कहना है कि पैसा खाते में आने से पहले की प्रक्रिया ही सबसे बड़ी बाधा बन गई है, जिससे मुआवजा वितरण की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
भार मुक्त प्रमाण पत्र और कागजात जुटाने में लग रहा लंबा समय
एयरपोर्ट विस्तार के लिए जेवर क्षेत्र के 14 गांवों की लगभग 1857.77 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है। प्रशासन किसानों से जरूरी दस्तावेज लेकर सीधे उनके बैंक खातों में मुआवजा भेज रहा है। इसके लिए गांवों में लेखपालों की तैनाती की गई है, लेकिन किसानों को सब रजिस्ट्रार कार्यालय से भूमि का भार मुक्त प्रमाण पत्र (बारह साला) लेना पड़ रहा है, जिसमें 10 से 15 दिन लग जा रहे हैं। इसके अलावा बैंकों से नो ड्यूज सर्टिफिकेट, खतौनी और शपथ पत्र जुटाने में भी काफी समय लग रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी हो रही है।
सरकार ने हिस्सेदारी के अनुसार जारी की हजारों करोड़ की रकम
एयरपोर्ट परियोजना के लिए कुल 8691 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाने हैं। इसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी 37.5 प्रतिशत है। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से अब तक तीन किस्तों में बड़ी धनराशि जारी कर दी है, जिससे लगभग पूरा सरकारी हिस्सा जिला प्रशासन को मिल चुका है। Noida International Airport Limited परियोजना से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि प्रशासन की कोशिश है कि किसानों को जल्द भुगतान मिले, लेकिन कागजी औपचारिकताएं समय ले रही हैं। दूसरी ओर स्थानीय निकाय और प्राधिकरण भी अपने हिस्से की रकम उपलब्ध करा चुके हैं।
आवेदनों की बढ़ती संख्या और स्टाफ की कमी बनी चुनौती
जमीन अधिग्रहण का अवार्ड घोषित होने के बाद प्रतिदिन 300 से 500 तक भार मुक्त प्रमाण पत्र के आवेदन आ रहे हैं। संबंधित कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी और कभी-कभी सर्वर या नेटवर्क समस्या भी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कोशिश रहती है कि एक सप्ताह के भीतर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए, लेकिन बढ़ते दबाव के कारण देरी हो जाती है। प्रशासन का दावा है कि प्रक्रिया को तेज करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






