नोएडा हादसे में युवराज मौत मामले में बड़ा एक्शन, प्राधिकरण के दो विभाग भंग, अब तक नहीं आई एसआईटी रिपोर्ट

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नोएडा सेक्टर-150 में इंजीनियर की मौत के बाद प्राधिकरण ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए दो विभाग भंग कर दिए। अधिकारियों के तबादले हुए, जबकि एसआईटी रिपोर्ट अब भी लंबित है। शहर में निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।

नोएडा सेक्टर-150 में मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए नोएडा प्राधिकरण ने अपने एनटीसी (नोएडा ट्रैफिक सेल) और जनस्वास्थ्य विभाग को भंग कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों के तबादले भी कर दिए गए हैं। हादसे के बाद पूरे शहर में निर्माण स्थलों और खुले गड्ढों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर सुरक्षा इंतजाम होते तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी। प्रशासन अब भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने का दावा कर रहा है।


जांच रिपोर्ट का इंतजार, जिम्मेदारी तय होना बाकी

घटना के बाद शासन स्तर पर जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया था, जिसने कुछ ही दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। हालांकि, अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही यह स्पष्ट हुआ है कि अंतिम रूप से किस विभाग या अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी। घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए गए और अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया। नए प्रशासनिक नेतृत्व के तहत कृष्णा करुणेश को जिम्मेदारी दी गई, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।


हादसे के बाद तेज हुए सुधार कार्य और निगरानी

दुर्घटना के बाद मौके पर तुरंत बैरिकेडिंग, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा से जुड़े अन्य सुधार कार्य कराए गए। साथ ही, शहर के अन्य निर्माण स्थलों की भी समीक्षा शुरू कर दी गई है। प्राधिकरण ने सभी वर्क सर्किल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और कई प्रभारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। प्रशासन का कहना है कि अब खुले गड्ढों, अधूरे निर्माण स्थलों और असुरक्षित इलाकों की नियमित निगरानी होगी। शहरवासियों का मानना है कि हादसे के बाद उठाए गए कदम सकारात्मक हैं, लेकिन स्थायी सुधार के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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