जेवर एयरपोर्ट जमीन अधिग्रहण मामले में भड़के किसान, मांगों को लेकर की महापंचायत, बड़े आंदोलन की चेतावनी
- Shiv Kumar
- 16 Feb, 2026
ग्रेटर नोएडा में जेवर एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित किसानों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसान संगठनों के आह्वान पर यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान जुटे और प्राधिकरण कार्यालय के बाहर महापंचायत आयोजित की गई। किसानों का कहना है कि लंबे समय से रोजगार, आबादी और मुआवजे से जुड़ी मांगें लंबित हैं, जिससे प्रभावित परिवारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन जल्द समाधान नहीं निकालता, तो यह महापंचायत अनिश्चितकालीन धरने में बदल सकती है। मौके पर बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
रोजगार और आबादी के अधिकार को लेकर किसानों की एकजुटता
महापंचायत में शामिल किसानों का कहना है कि एयरपोर्ट परियोजना के लिए जमीन देने के बाद भी स्थानीय युवाओं को अपेक्षित रोजगार नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने मांग उठाई कि परियोजना और उससे जुड़े उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट और पुनर्वास से जुड़ी मांगें भी प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आईं। किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय किए गए वादों को लागू किया जाना चाहिए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
प्राधिकरण कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, समाधान न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसानों ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और व्यापक होगा। प्रदर्शन का नेतृत्व किसान एकता संघ के बैनर तले किया गया, जिसमें आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। किसानों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल मुआवजे तक सीमित नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन को बातचीत कर स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि स्थिति तनावपूर्ण न बने।
एयरपोर्ट परियोजना से जुड़े क्षेत्र में बढ़ रही राजनीतिक और सामाजिक हलचल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को लेकर क्षेत्र में पहले से ही विकास और विस्थापन के मुद्दे चर्चा में रहे हैं। महापंचायत के बाद अब प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर ठोस लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे बड़े स्तर तक ले जाया जाएगा। फिलहाल सभी की नजर प्रशासन और किसानों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई है।
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