ग्रेटर नोएडा में अवैध कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, 37 करोड़ की जमीन कराई गई कब्जा मुक्त
- Shiv Kumar
- 16 Feb, 2026
ग्रेटर नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हजारों वर्गमीटर जमीन को कब्जा मुक्त कराया है। प्राधिकरण की टीम ने बिलासपुर क्षेत्र में चल रहे अवैध निर्माण को ध्वस्त करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि बिना अनुमति प्लॉटिंग या निर्माण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहे, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले। प्राधिकरण का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और अवैध निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।
बिलासपुर क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर
कार्रवाई बिलासपुर क्षेत्र में की गई, जहां खसरा संख्या 100, 104 और 105 की लगभग 18,770 वर्गमीटर जमीन पर अवैध निर्माण और प्लॉटिंग की शिकायत मिली थी। जांच में पाया गया कि कालोनाइजरों ने घरों और बाउंड्री बनाकर जमीन को बेचने की तैयारी कर ली थी। इसके बाद भूलेख और परियोजना विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर चलाया और अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 37.5 करोड़ रुपये है। कार्रवाई के दौरान मौजूद टीम ने साफ किया कि दोबारा निर्माण करने की कोशिश पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
सीईओ के निर्देश पर हुई कार्रवाई, लोगों को दी गई सख्त चेतावनी
यह पूरी कार्रवाई एनजी रवि कुमार के निर्देश पर की गई, जिसमें भूलेख विभाग के अधिकारियों ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर अभियान चलाया। अधिकारियों ने कहा कि अधिसूचित क्षेत्र में बिना नक्शा पास कराए या अनुमति के निर्माण करना पूरी तरह गैरकानूनी है। टीम ने स्थानीय लोगों को भी आगाह किया कि कम कीमत के लालच में अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदना भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकता है। इसलिए जमीन खरीदने से पहले संबंधित विभाग से सत्यापन जरूरी है। प्राधिकरण का दावा है कि ऐसी कॉलोनियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
खरीदारों से अपील, जांच के बाद ही खरीदें जमीन
कार्रवाई के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आम लोगों से अपील की है कि जमीन या प्लॉट खरीदने से पहले पूरी जानकारी जरूर हासिल करें। अधिकारियों ने बताया कि कई बार भू-माफिया और डीलर भोले-भाले लोगों को कम कीमत का लालच देकर जमीन बेच देते हैं, जो बाद में विवाद का कारण बनती है। इसलिए भूलेख विभाग से जमीन का रिकॉर्ड जांचना जरूरी है। प्राधिकरण ने साफ कहा है कि भविष्य में भी अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा ताकि शहर में नियोजित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
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