नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह एमिटी एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित, कहा- 10 सालों की वित्तीय क्रांति ने महिलाओं को बनाया सशक्त

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नोएडा के एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित इनबुश विश्व सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन महिला नेतृत्व और आत्मनिर्भरता पर विशेष सत्र हुआ। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता डा पिंकी आनंद समेत वक्ताओं ने अवसर, सम्मान और योगदान को सशक्तिकरण की असली कुंजी बताया।

नोएडा के एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित 26वें अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस क्षितिज ‘इनबुश विश्व सम्मेलन 2026’ के दूसरे दिन महिला नेतृत्व एवं कल्याण पर केंद्रित विशेष सत्र ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ पिंकी आनंद और बोइंग 787 की वरिष्ठ कमांडर अर्चना कपूर ने अपने अनुभव साझा किए। सत्र में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षाविद मौजूद रहे। वक्ताओं ने बदलते भारत में महिलाओं की भूमिका, आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मविश्वास को नई दिशा देने पर जोर दिया है। पूरे सत्र का संदेश साफ रहा कि अवसर, आत्मसम्मान और समर्पण के साथ महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती हैं।


आत्मनिर्भरता ही असली सशक्तिकरण

लक्ष्मी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बीते दस वर्षों में आई वित्तीय क्रांति ने महिलाओं को नई ताकत दी है। आज राष्ट्रीय और स्थानीय बैंकों में बड़ी संख्या में महिलाएं खाताधारक हैं, जो आर्थिक भागीदारी का संकेत है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में ‘बैंक सखी’ जैसी पहल ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर बैंकिंग सुविधा पहुंचा रही है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केवल समानता की बहस में उलझने के बजाय महिलाओं को अपनी क्षमता पहचाननी होगी। यदि वे लगातार दूसरों से तुलना करती रहेंगी तो उनका व्यक्तिगत विकास रुक सकता है। समाज द्वारा तय ढांचे में खुद को सीमित करने के बजाय अपनी उड़ान तय करना ही सच्चा सशक्तिकरण है।


योगदान की पहचान से आगे बढ़ेगा देश

उन्होंने आगे कहा कि देश केवल पारंपरिक संसाधनों के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता, बल्कि आधी आबादी के योगदान को उचित पहचान देना जरूरी है। जब महिलाएं अपने कार्य के प्रति सम्मान और समर्पण रखेंगी तो समानता स्वतः स्थापित होगी। चुनौतियों से पीछे हटना समाधान नहीं है। आज भारत बदलाव के दौर से गुजर रहा है और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महिलाओं की भागीदारी अहम मानी जा रही है। हर क्षेत्र—प्रशासन, न्यायपालिका, विमानन या व्यवसाय—में महिलाओं की मौजूदगी यह साबित कर रही है कि अवसर मिलने पर वे नेतृत्व की भूमिका बखूबी निभा सकती हैं।


अवसर और पहुंच सबसे महत्वपूर्ण

डा पिंकी आनंद ने कहा कि महिलाओं के लिए दो बातें सबसे अहम हैं—पहली, अवसरों तक पहुंच; और दूसरी, खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त समय और स्थान। यह बहस जरूरी नहीं कि महिलाएं पुरुषों से बेहतर हैं या नहीं, बल्कि असली सवाल यह है कि वे अपने क्षेत्र में क्या योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक युग में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, इसलिए आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। जब महिलाओं को समान अवसर और मंच मिलता है, तो वे अपनी क्षमता से समाज और देश को नई दिशा दे सकती हैं।

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