ग्रेटर नोएडा में सेमीकंडक्टर चिप यूनिट लगने से देश का होगा विकास, सालाना 45 हजार करोड़ जीडीपी योगदान का अनुमान, 3700 करोड़ का निवेश

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ग्रेटर नोएडा के जेवर में 3700 करोड़ रुपये के निवेश से इंडिया चिप की डीडीआईसी ओसैट यूनिट स्थापित होगी। 2028 तक शुरू होने वाली इस परियोजना से 3500 रोजगार सृजित होंगे और भारत की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

ग्रेटर नोएडा के जेवर में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) अब देश की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा का नया चेहरा बनता दिख रहा है। इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की डीडीआईसी ओसैट यूनिट का शिलान्यास सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। करीब 3700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाली यह यूनिट आने वाले वर्षों में देश की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तस्वीर बदल सकती है।


2028 तक शुरू होगी ओसैट यूनिट, हजारों को मिलेगा रोजगार

इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड दरअसल एचसीएल टेक्नोलॉजीज और Foxconn का 60:40 का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी जेवर में अत्याधुनिक ओसैट (OSAT) सुविधा स्थापित कर रही है, जिसके 2028 तक चालू होने की उम्मीद है। इस संयंत्र में स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल सिस्टम और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का उत्पादन किया जाएगा। प्रति माह 20,000 वेफर्स प्रोसेस करने की क्षमता वाला यह केंद्र देश में सेमीकंडक्टर कॉम्पोनेंट्स की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करेगा। अनुमान है कि इस परियोजना से करीब 3,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं के लिए यह बड़ा मौका माना जा रहा है।


डीडीआईसी ओसैट सुविधा क्यों है खास?

यह देश की पहली डिस्प्ले ड्राइवर इंटीग्रेटेड सर्किट (डीडीआईसी) ओसैट यूनिट होगी। अभी तक मोबाइल, टीवी, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल डिस्प्ले में इस्तेमाल होने वाले डीडीआईसी चिप्स का उत्पादन भारत में सीमित था, जिसके कारण आयात पर निर्भरता ज्यादा थी। इस यूनिट के शुरू होने से न सिर्फ आयात कम होगा, बल्कि घरेलू विनिर्माण को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी मजबूत होगी और देश सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा सकेगा।


यीडा क्षेत्र बनेगा हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र पहले ही लॉजिस्टिक्स, एयरोस्पेस और बड़े औद्योगिक निवेश के लिए जाना जाता है। अब सेमीकंडक्टर उद्योग के आने से यह इलाका हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में तेजी से उभरेगा।

एचसीएल और फॉक्सकॉन के संयुक्त निवेश से बनने वाली यह मेगा यूनिट तकनीकी उत्कृष्टता का केंद्र बनने की ओर बढ़ रही है। अनुमान है कि इस परियोजना से सालाना करीब 45,000 करोड़ रुपये का जीडीपी योगदान हो सकता है, जो क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम साबित होगा।

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