नोएडा में इनवेस्टमेंट के नाम पर बड़ा धोखा, 64 लाख रुपये की लगा दी चपत, 20 से अधिक बार ट्रांजैक्शन कराकर खाता किया खाली

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नोएडा के सेक्टर-58 में एक आर्किटेक्ट से फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर 64.59 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने व्हाट्सऐप और फर्जी वेबसाइट के जरिए मुनाफे का झांसा दिया। साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

उत्तर प्रदेश की शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा में निवेश के नाम पर बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। सेक्टर-58 के रजत विहार निवासी 57 वर्षीय आर्किटेक्ट से जालसाजों ने विदेशी मुद्रा ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर 64 लाख 59 हजार रुपये ठग लिए। पीड़ित ने यह रकम करीब 20 बार अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की। जब उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ तो उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब उन खातों की जांच कर रही है, जिनमें यह रकम भेजी गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।


व्हाट्सऐप से शुरू हुआ झांसा, वेबसाइट पर दिखाया फर्जी मुनाफा

पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि बीते साल नवंबर के पहले सप्ताह में उन्हें व्हाट्सऐप पर फॉरेक्स ट्रेडिंग से जुड़ा एक बिजनेस ऑफर मिला। खुद को आशी अग्रवाल बताने वाली एक महिला ने उनसे संपर्क किया और पांच से 20 मिनट की शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का दावा किया। उन्हें एक वेबसाइट के जरिए ट्रेडिंग कराई गई, जहां डैशबोर्ड पर लगातार मुनाफा दिखाया जाता था। इसी भरोसे में आकर पीड़ित ने निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया। 26 नवंबर 2025 से 11 फरवरी 2026 के बीच उन्होंने अपनी बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड तक तोड़कर कुल 64.59 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।


हर ट्रांजैक्शन से पहले बदलता था खाता नंबर

पीड़ित के अनुसार, हर बार पैसे ट्रांसफर करने से पहले उन्हें नया बैंक खाता नंबर दिया जाता था और 30 मिनट के भीतर रकम जमा करने को कहा जाता था। जब उन्होंने मुनाफा निकालने की कोशिश की तो उनसे 10 से 13 लाख रुपये और जमा करने की शर्त रखी गई। साथ ही कई अतिरिक्त नियमों का हवाला दिया गया। जब उन्होंने और पैसे देने से इनकार किया तो उनकी जमा राशि भी रोक दी गई। बाद में जांच में सामने आया कि वेबसाइट पर दिखाया गया मुनाफा पूरी तरह फर्जी था और निकासी जानबूझकर रोकी जा रही थी। आरोपी ने खुद को बेंगलुरु का बताया था, लेकिन उसकी पहचान की कोई ठोस पुष्टि नहीं हो सकी। फिलहाल साइबर क्राइम थाने में आईटी एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच जारी है।

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