शारदा अस्पताल में इलाज से पहले पैसे की मांग, ढाई साल के मासूम की गई जान, परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप

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ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल में ढाई साल के बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने इलाज से पहले पैसे मांगने और डॉक्टरों की लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि समय पर उपचार न मिलने के कारण मासूम की जान चली गई।

ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा हॉस्पिटल में इलाज से पहले पैसे मांगने के आरोप के बीच ढाई साल के एक मासूम की मौत का मामला सामने आया है। बच्चे के परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही और पुलिस पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।


तीन मंजिला इमारत से गिरा था मासूम

जानकारी के अनुसार ढाई वर्षीय गगन शुक्रवार को परी चौक के पास एक तीन मंजिला इमारत से गिर गया था। गगन के परिजन मजदूरी करते हैं। घटना के बाद घायल बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत देखते हुए डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

इसके बाद परिजन गगन को लेकर Sharda Hospital पहुंचे और तुरंत इलाज शुरू करने की गुहार लगाई।


इलाज से पहले पैसे जमा कराने का आरोप

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने पहले 28 हजार रुपये जमा कराने की बात कही। परिवार का कहना है कि उन्होंने डॉक्टरों से अनुरोध किया कि वे पैसे की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन पहले बच्चे का इलाज शुरू कर दिया जाए। परिजनों के मुताबिक इसके बाद एक अन्य डॉक्टर ने आकर बताया कि बच्चे के इलाज में रोजाना करीब 70 हजार रुपये का खर्च आएगा और पहले पैसे जमा करने को कहा गया।


डेढ़ घंटे तक इलाज नहीं होने का आरोप

मृतक बच्चे के परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने का आश्वासन दिया, लेकिन करीब एक से डेढ़ घंटे तक कोई उपचार नहीं किया गया। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है।

परिजनों का आरोप है कि बच्चे को न तो कोई प्राथमिक उपचार दिया गया और न ही कोई पट्टी की गई। उनका कहना है कि अगर समय पर इलाज मिलता तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी।


शव देने से पहले भी पैसे मांगने का आरोप

घटना के बाद जब परिजनों ने अस्पताल में विरोध जताया तो उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बच्चे का शव देने से पहले भी 28 हजार रुपये जमा कराने की बात कही। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने भी उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें अस्पताल से बाहर जाने का दबाव बनाया। बाद में पुलिस ने पंचनामा भरकर बच्चे का शव परिजनों को सौंप दिया।

मासूम गगन की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन डॉक्टरों की कथित लापरवाही और पुलिस के रवैये की जांच कर न्याय की मांग कर रहे हैं।

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