पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी को मजबूत करने की तैयारी, दादरी में अखिलेश यादव करेंगे बड़ी रैली, देंगे सियासी संदेश

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समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी में है। अखिलेश यादव दादरी में ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ करेंगे, जिसमें 50–60 हजार लोगों के शामिल होने की उम्मीद है और कई राजनीतिक संदेश देने की रणनीति है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी से अपनी सियासी रणनीति को धार देने जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से वर्ष 2026 की पहली बड़ी रैली नोएडा के दादरी क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। इस रैली को “समाजवादी समानता भाईचारा रैली” नाम दिया गया है, जिसका आयोजन गुर्जर समाज की ओर से किया जा रहा है। कार्यक्रम की अगुवाई सपा के प्रवक्ता राज कुमार भाटी करेंगे। पार्टी नेताओं का दावा है कि इस रैली में नोएडा और आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। अनुमान है कि 50 से 60 हजार लोग इस कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं।


रैली का मकसद: सामाजिक दूरी कम करने का संदेश

सपा नेताओं के मुताबिक इस रैली का उद्देश्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विभिन्न वर्गों के बीच बनी सामाजिक और राजनीतिक दूरी को कम करना है। भले ही आयोजन गुर्जर समाज की ओर से हो रहा है, लेकिन पार्टी की कोशिश सभी वर्गों के लोगों को इसमें शामिल करने की है। रैली के माध्यम से पार्टी जाट, गुर्जर, पिछड़े और मुस्लिम समुदायों के बीच संवाद और एकता का संदेश देना चाहती है। सपा इसे अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करने के रूप में भी देख रही है।


भाजपा और आरएलडी के नेताओं पर भी नजर

सूत्रों के मुताबिक रैली के दौरान Samajwadi Party कुछ बड़े राजनीतिक चेहरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में भी है। पार्टी की नजर खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के कुछ नेताओं पर है। बताया जा रहा है कि स्थानीय विधायकों, पूर्व विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधा जा रहा है, ताकि रैली के मंच से किसी बड़े नेता के शामिल होने का संदेश दिया जा सके।


दादरी से शुरुआत क्यों?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पश्चिमी यूपी चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। नोएडा और गाजियाबाद जैसे इलाके भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाते हैं। ऐसे में दादरी से रैली की शुरुआत करने का मकसद भाजपा के पारंपरिक वोटबैंक में सेंध लगाने का प्रयास माना जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रवींद्र प्रताप राणा के मुताबिक इस इलाके में लंबे समय तक Rashtriya Lok Dal का प्रभाव रहा है। 2022 के चुनाव में इसका असर भी देखने को मिला था। इसी कारण सपा ने पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है।


2022 और 2024 के चुनावों का असर

2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोक दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर जैसे जिलों में गठबंधन को अच्छा प्रदर्शन मिला था।

हालांकि बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद और अलीगढ़ जैसे जिलों में गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। बाद में रालोद सपा से अलग होकर भाजपा के साथ चली गई। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। पश्चिमी यूपी में भी कई सीटों पर इस गठबंधन को सफलता मिली थी।


दादरी में गुर्जर समाज का प्रभाव

सपा के नोएडा जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी के अनुसार दादरी क्षेत्र में गुर्जर समाज की बड़ी आबादी है। उनका दावा है कि यहां करीब दो लाख गुर्जर समुदाय के लोग रहते हैं। पार्टी का मानना है कि यदि इस वर्ग के साथ-साथ अन्य समुदायों का समर्थन मिला तो पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।


क्या यहीं से 2027 अभियान का आगाज?

हालांकि पार्टी ने अभी आधिकारिक तौर पर 2027 के चुनावी अभियान की शुरुआत की घोषणा नहीं की है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई का कहना है कि पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही संगठन को मजबूत करने में जुटी है।

उनके अनुसार पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर समाज की बड़ी आबादी है, इसलिए यहां भाईचारा सम्मेलन और जनसभाओं के जरिए पार्टी अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, ऐसे कार्यक्रमों की संख्या और बढ़ेगी।

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