कानपुर फर्जी डिग्री केस में नोएडा से पकड़ा गया बिचौलिया, कई यूनिवर्सिटी में कर चुका है काम, पुलिस ने शुरू की पूछताछ
- Shiv Kumar
- 11 Mar, 2026
कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले बड़े गिरोह के मामले में जांच कर रही एसआईटी को अहम सफलता मिली है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े एक बिचौलिए को नोएडा से हिरासत में लिया है। वीके नाम से पहचाना जाने वाला यह व्यक्ति देश की कई यूनिवर्सिटियों के लिए मार्केटिंग का काम करता था और गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र ओझा के संपर्क में रहकर लोगों को डिग्री उपलब्ध कराने का काम करता था। पुलिस के अनुसार आरोपी यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये वसूलता था और बाद में गिरोह के जरिए फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार कराकर उन्हें दे देता था। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
छापे में 900 से ज्यादा फर्जी डिग्री और मार्कशीट बरामद
इस मामले की शुरुआत 18 फरवरी को हुई कार्रवाई से हुई थी, जब पुलिस ने जूही गौशाला चौराहे के पास स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय पर छापा मारा था। छापेमारी के दौरान वहां से 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और यूपी बोर्ड की 900 से अधिक मार्कशीट और डिग्री बरामद की गई थीं। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा और एलएलबी जैसे कई पाठ्यक्रमों की डिग्रियां शामिल थीं। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि यह गिरोह वर्ष 2012 से फर्जी डिग्री, माइग्रेशन और अंकपत्र तैयार करने का धंधा चला रहा था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा था और अलग-अलग राज्यों के लोगों को भी इसमें शामिल किया गया था।
मास्टरमाइंड शैलेंद्र ओझा समेत कई आरोपी पहले ही गिरफ्तार
पुलिस जांच में इस गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा सामने आया था। पुलिस ने उसे उसके साथियों नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच के दौरान पुलिस को शैलेंद्र के बैंक खातों में पिछले चार वर्षों में करीब पांच करोड़ रुपये के लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं। अब मामले की जांच कर रही एसआईटी ने बरामद डिग्री और मार्कशीट के सत्यापन के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। टीमों को सिक्किम, झारखंड और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भेजा गया है, जहां विश्वविद्यालयों में दस्तावेजों की जांच की जाएगी और संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।
कॉल डिटेल से मिला बिचौलिए का सुराग
एसआईटी प्रभारी योगेश कुमार के अनुसार शैलेंद्र ओझा के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के दौरान इस बिचौलिए का पता चला था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे नोएडा से हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह नोएडा, जयपुर और हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग का काम कर चुका है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और भी कई लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
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