ग्रेटर नोएडा में बनेगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क, 174 एकड़ में विकसित होगा मेगा प्रोजेक्ट, बड़े निवेश वाली कंपनियों को होगा फायदा
- Shiv Kumar
- 23 Mar, 2026
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस योजना के तहत ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ जमीन पर आधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किया जाएगा। सरकार की नई नीति के अनुसार, इस तरह की परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे न सिर्फ क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
1000 करोड़ निवेश पर मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
राज्य सरकार की मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024 के तहत कम से कम 1000 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे निवेशकों को 30 प्रतिशत तक फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी दी जाएगी, जो केवल सरकारी या औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा लीज पर दी गई जमीन पर ही लागू होगी। इस प्रस्ताव को पहले ही उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी थी। यह सब्सिडी निवेशकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी और प्रदेश में बड़े स्तर पर लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने में मदद करेगी।
174 एकड़ में विकसित होगा हाईटेक पार्क
यह लॉजिस्टिक्स पार्क ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टर कप्पा-02 में करीब 174.12 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए नियम, शर्तें और ब्रोशर को भी मंजूरी मिल चुकी है। भूमि आवंटन के लिए ई-नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इस पार्क में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे माल परिवहन, स्टोरेज और वितरण की व्यवस्था अधिक सुगम और तेज हो सकेगी।
7 साल में पूरा करना होगा प्रोजेक्ट, तय हुई कीमत
इस परियोजना के लिए भूमि का आरक्षित मूल्य 11,000 रुपये प्रति वर्गमीटर तय किया गया है। 30 प्रतिशत सब्सिडी की गणना भी इसी आधार पर होगी। सफल बोलीदाता को यह प्रोजेक्ट 7 वर्षों में पूरा करना होगा, जिसमें पहले 3 वर्षों में कम से कम 40 प्रतिशत काम पूरा करना अनिवार्य होगा। विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 2 वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से उत्तर प्रदेश को लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नई पहचान मिलेगी और प्रदेश देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शामिल हो सकेगा।
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