बच्ची गोद दिलाने के नाम पर ठगी के मामले में सख्त एक्शन, नर्स समेत उसका प्रेमी गिरफ्तार, पुलिस ने अब तक पांच को दबोचा, अस्पताल सीज

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ग्रेटर नोएडा के बिसरख में बच्ची को गोद दिलाने के नाम पर ठगी के मामले में पुलिस ने नर्स और उसके प्रेमी समेत दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया। अब तक पांच गिरफ्तारी हो चुकी हैं, जबकि अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर उसे सीज कर दिया गया है।

ग्रेटर नोएडा के बिसरख क्षेत्र में बच्ची को गोद दिलाने के नाम पर अवैध वसूली के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक निजी अस्पताल की नर्स और उसका प्रेमी शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या पांच हो गई है, जबकि संबंधित अस्पताल को सीज कर दिया गया है। पुलिस को इस पूरे नेटवर्क के और भी बड़े होने का शक है, जिसकी जांच तेजी से की जा रही है।


चाइल्ड हेल्पलाइन की सूचना पर खुला मामला
एसीपी सेंट्रल नोएडा पवन कुमार के मुताबिक, 21 मार्च को चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सूचना मिली थी कि एक निजी अस्पताल का कर्मचारी बच्ची को गोद दिलाने के नाम पर 2.60 लाख रुपये मांग रहा है। सूचना मिलते ही एएचटी और बिसरख पुलिस ने संयुक्त जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोप सही पाए गए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मंगलवार को अरुण कुमार और नर्स पुष्पा रानी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी इस अवैध सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभा रहे थे और पूरी साजिश में शामिल थे।


पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां, नेटवर्क की जांच जारी
इससे पहले रविवार को पुलिस तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी जरूरतमंद परिवारों को निशाना बनाकर उन्हें बच्चा गोद दिलाने का झांसा देते थे और इसके बदले मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह अवैध धंधा कब से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं।


अस्पताल सीज, लाइसेंस भी रद्द
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर उसे सीज कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को दें, ताकि ऐसे गिरोहों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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