नोएडा में स्वास्थ विभाग का अबतक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा, जिला अस्पताल ने 60 हजार रुपये में बना दी मेडिको लीगल की फर्जी रिपोर्ट
- Shiv Kumar
- 03 Apr, 2026
नोएडा में स्वास्थ्य विभाग को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला अस्पताल और दादरी सीएचसी में कथित तौर पर पैसे लेकर फर्जी MLC (मेडिको लीगल केस) रिपोर्ट बनाने का बड़ा खेल उजागर हुआ है। ग्रेटर नोएडा निवासी इमलाक हुसैन ने आरोप लगाया है कि बिना किसी गंभीर चोट के ही उनकी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर दी गई। इस मामले ने पूरे विभाग में हलचल मचा दी है। खास बात यह है कि डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, लेकिन इस मामले में उन्हीं पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोपों के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े के जरिए किसी को भी आसानी से आरोपी या बेगुनाह बनाया जा सकता है, जो न्याय व्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा है।
बिना चोट के बना दी गंभीर चोटों की रिपोर्ट
पीड़ित इमलाक हुसैन का कहना है कि उनकी MLC रिपोर्ट में पसली में बाल (फ्रैक्चर) दिखाया गया, जबकि हकीकत में उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं लगी थी। रिपोर्ट में सिर और कान में भी चोट दिखाई गई, जबकि वह पूरी तरह स्वस्थ थे। उन्होंने बताया कि बिना सही जांच के ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। अगर बिना जांच के इस तरह की रिपोर्ट तैयार की जा सकती है, तो इसका गलत इस्तेमाल कर किसी को भी फंसाया जा सकता है। यही वजह है कि यह मामला अब काफी गंभीर होता जा रहा है और लोग भी इस पर सवाल उठा रहे हैं।
पैसों के बदले तैयार हुई फर्जी रिपोर्ट
इमलाक हुसैन ने आरोप लगाया कि इस फर्जी MLC रिपोर्ट के लिए उनसे दादरी सीएचसी में 11 हजार रुपये और जिला अस्पताल में 60 हजार रुपये लिए गए। यानी कुल मिलाकर मोटी रकम लेकर यह रिपोर्ट बनाई गई। यह सुनकर हर कोई हैरान है कि जिस सिस्टम से लोगों को न्याय और सही इलाज की उम्मीद होती है, वहीं इस तरह का खेल चल रहा है। इस मामले में टेक्नीशियन अभिषेक और एक वार्ड बॉय को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही सीएमओ ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पूरे सिस्टम पर उठे सवाल, कई डॉक्टरों पर आरोप
इस पूरे मामले में जिला अस्पताल और दादरी सीएचसी के कई डॉक्टरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि यह काम अकेले किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक पूरे नेटवर्क के जरिए किया जा रहा था। अब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इसमें कितने लोग शामिल हैं। फिलहाल, इस कार्रवाई को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक बड़ा टेस्ट माना जा रहा है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो आने वाले समय में और भी कड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
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