ग्रेटर नोएडा में आग ने मचाई तबाही, जलकर राख हो गईं 15 झोपड़ियां, पुलिस और समाजसेवियों ने बांटा भोजन और कपड़े

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ग्रेटर नोएडा के ननुआ का राजपुर गांव में आग लगने से 15 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। कई परिवार बेघर हो गए, जबकि पुलिस और समाजसेवियों ने राहत पहुंचाकर भोजन, कपड़े और आर्थिक मदद दी।

ग्रेटर नोएडा के दनकौर कोतवाली क्षेत्र के ननुआ का राजपुर गांव में गुरुवार को अचानक लगी भीषण आग ने सपेरा समुदाय के करीब 15 परिवारों को बेघर कर दिया। देखते ही देखते आग ने झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही देर में सबकुछ जलकर राख हो गया। इस हादसे में पीड़ित परिवारों का खाने-पीने का सामान, कपड़े और रोजमर्रा की जरूरी चीजें पूरी तरह खत्म हो गईं। जिन लोगों ने बड़ी मुश्किल से अपना घर बसाया था, उनकी आंखों के सामने सबकुछ बर्बाद हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा और लोग एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते नजर आए।


पल भर में उजड़ गया गरीबों का आशियाना

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। झोपड़ियां एक-दूसरे के बेहद पास होने की वजह से आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया। परिवार किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकले, लेकिन उनका सारा सामान अंदर ही जल गया। कई परिवारों के पास अब पहनने तक के कपड़े नहीं बचे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत देखकर हर कोई भावुक हो गया। इस घटना ने एक बार फिर गरीब तबके की असुरक्षा को उजागर कर दिया, जहां एक छोटी सी चिंगारी पूरी जिंदगी को बर्बाद कर देती है।


पुलिस और समाजसेवियों ने संभाली स्थिति

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाने की कोशिश शुरू की। राहत कार्य में मिथिलेश, रविकांत और कांस्टेबल अरुण सहित कई पुलिसकर्मी जुटे रहे। इसके साथ ही पेमू नागर, जनित और गोविंद जैसे समाजसेवियों ने भी आगे बढ़कर पीड़ित परिवारों की मदद की। सभी ने मिलकर प्रभावित लोगों को भोजन, कपड़े और जरूरी सामान उपलब्ध कराया, ताकि उन्हें तुरंत राहत मिल सके।


मदद का भरोसा, लोगों ने की सराहना

राहत अभियान के दौरान पुलिस और समाजसेवियों ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता भी दी और भविष्य में हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इस मुश्किल वक्त में जिस तरह से सभी ने मिलकर सहयोग किया, उसकी स्थानीय लोगों ने खुलकर सराहना की। हालांकि, आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है, ताकि आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और प्रभावित परिवारों को स्थायी सहायता मिल सके।

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