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नोएडा प्रदर्शन को लेकर क्या बोले नेता? राहुल और अखिलेश से लेकर कई नेताओं ने सरकार को घेरा

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मजदूरों की मजदूरी और प्रदर्शन को लेकर बृजभूषण सिंह, राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने अलग-अलग बयान दिए। सभी नेताओं ने मजदूरों की समस्याओं और सरकार की भूमिका पर अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दी।

नोएडा में वेतन बढ़ोतरी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। श्रमिकों के आंदोलन और हालिया हिंसक घटनाओं के बाद अब राजनीतिक दल खुलकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। मजदूरों की कम मजदूरी, बढ़ती महंगाई और काम की परिस्थितियों को लेकर नेताओं ने सरकार को घेरा है। वहीं कुछ नेताओं ने मजदूरों की मांगों को जायज बताते हुए वेतन बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। इस मुद्दे ने अब स्थानीय विवाद से निकलकर बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है।


इतनी कम मजदूरी में कोई कैसे जी सकता है?
ब्रजभूषण शरण सिंह ने गोंडा में मजदूरों की कम मजदूरी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मजदूरों को मिलने वाली 11–12 हजार रुपए की मजदूरी सम्मानजनक नहीं है और इतने में कोई व्यक्ति अपना गुजारा नहीं कर सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मजदूरों की कमाई का बड़ा हिस्सा किराए और खाने में ही खत्म हो जाता है। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसके पास कुछ भी नहीं बचता। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है और उनकी मजदूरी बढ़ाई जानी चाहिए।


मेहनत करने वाले मजदूरों को नहीं मिल रहा हक

राहुल गांधी ने मजदूरों के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मेहनत करने वाले मजदूरों को उनका हक नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग दिन-रात काम करते हैं, उन्हें बदले में दबाव और अत्याचार झेलना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने बिना पर्याप्त संवाद के श्रम कानून लागू किए, जिससे काम के घंटे बढ़ गए। राहुल गांधी ने कहा कि मजदूरों की 20 हजार रुपए तक की मांग कोई लालच नहीं, बल्कि उनका अधिकार है और वह हर मजदूर के साथ खड़े हैं।


नोएडा की हिंसा सरकार की नाकामी

अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि हालात सरकार की नाकामी का नतीजा हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कमजोरी के कारण ही ऐसी स्थिति बनी है। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री और सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि श्रमिकों के मुद्दों को समय पर हल नहीं किया गया, जिससे हालात बिगड़ गए। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलनों से आम लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है, इसलिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।

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