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10 दिन बाद थी बेटी की शादी, जल गया सारा सामान और सारे सपने, गाजियाबाद की दर्दनाक कहानी

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गाजियाबाद के कनावनी गांव में लगी भीषण आग ने सैकड़ों झुग्गियों को राख कर दिया। बेटियों की शादी के लिए जुटाया सामान और नकदी जल गई। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और अब उनके सामने जीवन की नई चुनौती खड़ी है।

गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित कनावनी गांव में लगी भीषण आग ने सिर्फ झुग्गियां नहीं जलाईं, बल्कि सैकड़ों गरीब परिवारों के सपनों को भी राख कर दिया। यहां 15 साल से रह रहे मजदूर परिवारों के लिए यह हादसा किसी टूटते आसमान से कम नहीं था। जिन घरों में बेटियों की शादी की तैयारी चल रही थी, वहां अब सिर्फ राख और आंसू बचे हैं। महिलाएं अपनी जली हुई झुग्गियों को देख बिलखती रहीं, जबकि बच्चे आग बुझने के बाद अपने खिलौने और किताबें ढूंढते नजर आए। हर चेहरा एक ही सवाल पूछ रहा था—अब कहां जाएं, कैसे जीएं?


बेटी की शादी के लिए जोड़ा था हर सपना, सब कुछ राख में बदल गया

बिहार के दरभंगा निवासी मोहम्मद अख्तर की आवाज में दर्द साफ झलकता है। उन्होंने बताया कि 15 साल की मेहनत के बाद उन्होंने अपनी 18 साल की बेटी की शादी के लिए 50 हजार रुपए और दहेज का सामान इकट्ठा किया था। लेकिन एक फोन कॉल ने उनकी दुनिया बदल दी। जब वह पत्नी के साथ भागकर पहुंचे, तो सब कुछ जल चुका था। वहीं जब्बार खान भी टूटे हुए नजर आए। उनकी बेटी की शादी महज 10 दिन बाद थी, लेकिन दहेज का सारा सामान आग में खत्म हो गया। अब उनके पास न घर बचा है, न उम्मीद। बस आंखों में आंसू और दिल में बेबसी रह गई है।


“ये झोपड़ी नहीं, हमारा घर था”—खुले में कट रही रातें, भविष्य अधर में

22 साल की रोशनी, जो एक छोटा सा ब्यूटी पार्लर चलाती हैं, अपनी जली हुई दुनिया को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह झोपड़ी नहीं, उनका घर था, जहां पूरा परिवार साथ रहता था। फ्रिज, कूलर, बिस्तर—सब कुछ आग में खत्म हो गया। एक दिन बाद उन्हें अपने भाई की शादी में जाना था, लेकिन अब उनके पास पहनने तक के कपड़े नहीं बचे। फातिमा की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है, जिनके डेढ़ लाख रुपए और जरूरी सामान जल गए। रात मिट्टी पर गुजरी और दिन की तपती धूप अब नई परीक्षा बनकर सामने खड़ी है।


चार घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग, लेकिन जख्म अभी भी जिंदा हैं

गुरुवार दोपहर लगी इस भीषण आग ने करीब 150 से 200 झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया। कई गैस सिलेंडर फटने से अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर भागते नजर आए। दमकल की 25 गाड़ियों ने करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस हादसे में एक एनीमल सेंटर भी जल गया, जहां 7 कुत्तों की मौत हो गई। अब यहां सिर्फ जली हुई जमीन, बिखरी हुई यादें और टूटे हुए सपने बचे हैं, जो हर गुजरते पल के साथ दर्द को और गहरा कर रहे हैं।

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