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नोएडा के उद्योग बंधुओं ने हाई लेवल कमिटी पर बिना सहमति वेतन वृद्धि का लगाया आरोप, कहा- इससे आर्थिक दबाव बढ़ेगा

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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर उद्योगपतियों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर विरोध जताया। उन्होंने हाई पावर कमेटी पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना सहमति वेतन बढ़ाया गया। उद्योगपतियों ने मुआवजा और सरकारी राहत की मांग की।

ग्रेटर नोएडा। नोएडा में कर्मचारियों की वेतन वृद्धि को लेकर अब उद्योग जगत में बेचैनी खुलकर सामने आने लगी है। शुक्रवार को कई औद्योगिक संगठनों ने एकजुट होकर संयुक्त प्रेस वार्ता की और अपनी चिंता जाहिर की। उद्यमियों का कहना है कि वे मजदूरों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरीके से वेतन वृद्धि लागू की जा रही है, उससे उद्योगों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ सकता है। उनका मानना है कि अगर समय रहते इस पर संतुलित फैसला नहीं लिया गया, तो इसका असर कंपनियों के संचालन और रोजगार दोनों पर पड़ सकता है।


हाई पावर कमेटी पर सवाल, कहा— बिना सहमति बढ़ा दिया वेतन

प्रेस वार्ता के दौरान उद्यमियों ने हाई पावर कमेटी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि वेतन वृद्धि को लेकर अंतिम सहमति बनने से पहले ही इसे लागू कर दिया गया, जो उद्योगों के लिए झटका है। उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले में सभी पक्षों की सहमति जरूरी होती है, लेकिन इस मामले में उनकी बातों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। इससे उद्योगपतियों में असंतोष बढ़ा है और उन्हें भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले से उद्योग और श्रमिकों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है।


तोड़फोड़ से बढ़ी परेशानी, मुआवजे और राहत की मांग

उद्यमियों ने हाल ही में कंपनियों में हुई तोड़फोड़ की घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि इससे उनका नुकसान और बढ़ गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए। साथ ही उन्होंने टैक्स और अन्य सरकारी शुल्कों में राहत देने की भी मांग रखी, ताकि वेतन वृद्धि के बढ़ते बोझ से कुछ राहत मिल सके। उनका कहना है कि अगर सरकार सहयोग नहीं करेगी, तो कई छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए टिके रहना मुश्किल हो सकता है।


सरकार को दिए सुझाव, कहा—संवाद से निकले समाधान

प्रेस वार्ता में शामिल विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने सरकार को कई सुझाव भी दिए। उन्होंने अपील की कि उद्योग और श्रमिकों के बीच संतुलन बनाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाया जाए। उद्यमियों का मानना है कि अगर दोनों पक्षों को साथ लेकर फैसले किए जाएंगे, तो न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि औद्योगिक विकास भी प्रभावित नहीं होगा। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि आने वाले समय में उद्योगों और कर्मचारियों के बीच यह टकराव किस दिशा में जाएगा।

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