नोएडा प्राधिकरण का बड़ा फैसला, अब वाहनों और मशीनों की ईंधन खपत में होगी 20 प्रतिशत की कटौती
- Shiv Kumar
- 15 May, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मितव्ययिता एवं संसाधन संरक्षण के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के निर्देश पर अब प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित सभी हल्के और भारी वाहनों के साथ-साथ विभिन्न मशीनों की प्रतिदिन होने वाली ईंधन खपत में 20 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी। इस फैसले को “क्लीन नोएडा-ग्रीन नोएडा” अभियान को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि बढ़ती ईंधन खपत और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इससे न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अनावश्यक रूप से वाहनों और मशीनों का संचालन न किया जाए तथा ईंधन उपयोग की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
ईंधन बचत के साथ प्रदूषण नियंत्रण पर भी फोकस
नोएडा प्राधिकरण का मानना है कि ईंधन की बचत केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी बेहद जरूरी है। लगातार बढ़ते प्रदूषण और ऊर्जा संसाधनों के दबाव को देखते हुए यह फैसला दूरदर्शी माना जा रहा है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का पालन प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। इसके तहत वाहनों के उपयोग का रिकॉर्ड रखा जाएगा और यह देखा जाएगा कि किस विभाग में कितनी ईंधन खपत हो रही है। जरूरत पड़ने पर वाहनों के संचालन की समय-सारणी भी तय की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी और शहर को स्वच्छ एवं हरित बनाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।
अन्य विभागों के लिए भी बन सकता है उदाहरण
प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार यह अभियान प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो इससे सरकारी संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही आने वाले समय में अन्य सरकारी विभाग और संस्थान भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं। नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि स्मार्ट गवर्नेंस और सतत विकास की दिशा में यह पहल सकारात्मक परिणाम देने वाली साबित होगी। ऊर्जा संरक्षण को लेकर सरकार लगातार गंभीर है और इसी कड़ी में अब स्थानीय प्रशासनिक संस्थाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
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